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जिन्नों की दुनिया की रानी

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उत्तर प्रदेश के “नूराबाद” गांव में सना नाम की एक बेहद खूबसूरत लड़की रहती थी। गोरा चेहरा… लंबे काले बाल… बड़ी मासूम आंखें… पूरा गांव उसकी खूबसूरती की तारीफ करता था। लेकिन सना बाकी लड़कियों जैसी नहीं थी। उसे अकेले रहना पसंद था। वो अक्सर गांव के बाहर पुराने कब्रिस्तान के पास बैठी रहती… घंटों आसमान को देखती रहती। गांव वाले कहते थे— “उस लड़की पर किसी परछाई का असर है।” क्योंकि पिछले कुछ महीनों से सना बहुत बदल गई थी। वो रात में छत पर किसी से बातें करती थी। कभी-कभी बिना वजह मुस्कुराने लगती… और कई बार आधी रात को घर से बाहर चली जाती। उसकी मां बहुत परेशान रहती थी। एक रात सना की मां की नींद अचानक खुली। उन्होंने देखा… सना अपने कमरे में नहीं थी। पूरा घर अंधेरे में डूबा हुआ था। बाहर तेज हवा चल रही थी। सना की मां घबराकर उसे ढूंढने लगीं। तभी उनकी नजर छत पर गई… और जो उन्होंने देखा… उसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सना छत के कोने में खड़ी थी। उसके लंबे बाल हवा में उड़ रहे थे। और वो किसी अदृश्य इंसान से बात कर रही थी। धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी। उसकी मां डरते हुए बोली— “सना… किससे बात कर रही हो?” सना...

गरीब लड़का और करोड़पति औरत की शादी

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उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गव “बरवा खेड़ा” में अर्जुन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। उसका घर मिट्टी का बना हुआ था, जिसकी दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ चुकी थीं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और गर्मियों में घर भट्टी जैसा तपता था। अर्जुन की मां सिलाई करके घर चलाती थी और अर्जुन गांव में मजदूरी करता था। कभी खेतों में काम करता… कभी ईंट ढोता… तो कभी बाजार में बोरे उठाने का काम। दिन भर कड़ी मेहनत करने के बाद भी उसके घर में कभी भरपेट खाना नहीं बनता था। लेकिन एक चीज थी जो अर्जुन को गांव के बाकी लड़कों से अलग बनाती थी — उसका दिल। वो बहुत ईमानदार था। गांव में अगर किसी का पैसा गिर जाए तो अर्जुन उसे वापस लौटा देता था। अगर किसी बूढ़े को सड़क पार करनी हो तो सबसे पहले अर्जुन ही मदद करता था। गांव वाले कहते थे— “गरीब जरूर है… लेकिन लड़का सोने जैसा है।” अर्जुन हर सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता था। मां के पैर छूकर काम पर निकलता और शाम को थका हुआ लौटता। उसकी मां हमेशा कहती— “बेटा… गरीब होना बुरी बात नहीं है। बस इंसानियत कभी मत छोड़ना।” अर्जुन मुस्कुराकर कहता— “मां, हमारे पास पैसे नहीं हैं… लेकि...

काले कुएं का डरावना राज

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  उत्तर प्रदेश के एक छोटे और पुराने गांव देवगढ़ में एक ऐसा कुआं था… जिसके पास रात में जाने की हिम्मत कोई नहीं करता था। गांव के बुजुर्ग कहते थे कि उस कुएं में एक औरत की आत्मा रहती है। एक ऐसी औरत… जो रात होते ही रोती थी। और जो भी उसकी आवाज सुनकर कुएं के पास गया… वो कभी वापस नहीं आया। गांव वाले उस जगह को “काले कुएं” के नाम से जानते थे। दिन में भी वहां अजीब सा सन्नाटा रहता था। कुएं के आसपास बड़े-बड़े सूखे पेड़ थे। उनकी टेढ़ी-मेढ़ी शाखाएं हवा चलने पर ऐसे हिलती थीं जैसे कोई हाथ बुला रहा हो। लेकिन गांव के कुछ लड़के इन बातों को सिर्फ अफवाह मानते थे। उन्हीं लड़कों में एक था 21 साल का वीर। वीर गांव का सबसे निडर लड़का माना जाता था। लंबा कद, मजबूत शरीर, और आंखों में हमेशा चुनौती का घमंड। वो अक्सर गांव वालों से कहता— “भूत-प्रेत कुछ नहीं होते… ये सब लोगों का डर है।” वीर के साथ उसका दोस्त गुड्डू भी रहता था। लेकिन गुड्डू वीर जितना बहादुर नहीं था। एक रात गांव में चौपाल लगी हुई थी। कुछ बूढ़े लोग फिर उसी कुएं की बातें कर रहे थे। एक बूढ़ा आदमी कांपती आवाज में बोला— “मैंने अपनी आंखों से देखा था… आधी रा...