जिन्नों की दुनिया की रानी
उत्तर प्रदेश के “नूराबाद” गांव में सना नाम की एक बेहद खूबसूरत लड़की रहती थी।
गोरा चेहरा…
लंबे काले बाल…
बड़ी मासूम आंखें…
पूरा गांव उसकी खूबसूरती की तारीफ करता था।
लेकिन सना बाकी लड़कियों जैसी नहीं थी।
उसे अकेले रहना पसंद था।
वो अक्सर गांव के बाहर पुराने कब्रिस्तान के पास बैठी रहती…
घंटों आसमान को देखती रहती।
गांव वाले कहते थे—
“उस लड़की पर किसी परछाई का असर है।”
क्योंकि पिछले कुछ महीनों से सना बहुत बदल गई थी।
वो रात में छत पर किसी से बातें करती थी।
कभी-कभी बिना वजह मुस्कुराने लगती…
और कई बार आधी रात को घर से बाहर चली जाती।
उसकी मां बहुत परेशान रहती थी।
एक रात सना की मां की नींद अचानक खुली।
उन्होंने देखा…
सना अपने कमरे में नहीं थी।
पूरा घर अंधेरे में डूबा हुआ था।
बाहर तेज हवा चल रही थी।
सना की मां घबराकर उसे ढूंढने लगीं।
तभी उनकी नजर छत पर गई…
और जो उन्होंने देखा…
उसे देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
सना छत के कोने में खड़ी थी।
उसके लंबे बाल हवा में उड़ रहे थे।
और वो किसी अदृश्य इंसान से बात कर रही थी।
धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी।
उसकी मां डरते हुए बोली—
“सना… किससे बात कर रही हो?”
सना अचानक चुप हो गई।
कुछ सेकंड तक वो स्थिर खड़ी रही।
फिर धीरे-धीेरे उसने पीछे मुड़कर देखा।
उसकी आंखें पूरी काली हो चुकी थीं।
मां डरकर चीख पड़ीं।
अचानक तेज हवा चली…
और छत पर रखा सारा सामान इधर-उधर उड़ने लगा।
सना की आवाज अचानक बदल गई।
भारी और डरावनी।
“उसे परेशान मत करो…”
मां कांपने लगीं।
“क… कौन हो तुम?”
सना मुस्कुराई।
लेकिन वो मुस्कान इंसानी नहीं लग रही थी।
“वो अब अकेली नहीं है…”
अगली सुबह पूरे गांव में ये खबर फैल गई।
लोग कहने लगे—
“सना पर जिन्न का साया है।”
कुछ लोग तांत्रिक बुलाने की बात करने लगे।
लेकिन सना बिल्कुल सामान्य थी।
वो ऐसे व्यवहार कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही ना हो।
उसकी मां रोते हुए बोलीं—
“बेटी… सच बता, क्या हो रहा है?”
सना कुछ पल चुप रही।
फिर धीरे से बोली—
“अम्मी… वो बुरा नहीं है।”
मां के हाथ कांपने लगे।
“कौन?”
सना की आंखों में अजीब चमक आ गई।
“उसका नाम अज़हान है…”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
मां डरते हुए बोलीं—
“कौन अज़हान?”
सना हल्का सा मुस्कुराई।
“वो मुझसे प्यार करता है।”
ये सुनते ही उसकी मां रोने लगीं।
उन्हें समझ आ गया…
मामला बहुत खतरनाक हो चुका है।
उस रात गांव की मस्जिद के मौलवी साहब को बुलाया गया।
उन्होंने सना को देखते ही कुछ अजीब महसूस किया।
कमरे की हवा अचानक भारी हो गई।
दीवार पर टंगा शीशा अपने आप हिलने लगा।
मौलवी साहब ने धीरे से पूछा—
“तुम कौन हो?”
कुछ सेकंड तक सना चुप रही।
फिर अचानक उसकी गर्दन अजीब तरीके से टेढ़ी हो गई।
और उसके मुंह से एक आदमी की आवाज निकली—
“मैं उसे लेने आया हूं…”
कमरे में बैठे सभी लोग डर गए।
मौलवी साहब ने कुरान की आयत पढ़नी शुरू की।
अचानक सना जोर-जोर से चीखने लगी।
कमरे की लाइटें अपने आप जलने-बुझने लगीं।
खिड़कियां धड़ाम-धड़ाम बंद होने लगीं।
और तभी…
कमरे के कोने में काला धुआं दिखाई देने लगा।
धीरे-धीरे वो धुआं इंसान का आकार लेने लगा।
लंबा काला साया…
लाल आंखें…
और बेहद डरावनी मुस्कान।
सना अचानक मुस्कुराने लगी।
“अज़हान…”
उस साये ने धीरे से हाथ बढ़ाया।
“मैं तुम्हें लेने आया हूं…”
सना उसकी तरफ बढ़ने लगी।
लेकिन तभी मौलवी साहब जोर से आयत पढ़ने लगे।
पूरा कमरा कांपने लगा।
काला साया गुस्से में चीख पड़ा।
उसकी आवाज इतनी डरावनी थी कि घर की दीवारों तक में दरारें पड़ने लगीं।
अचानक सना जमीन पर गिर गई।
और बेहोश हो गई।
जब उसे होश आया…
तो उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।
वो धीरे से बोली—
“वो वापस आएगा…”
मौलवी साहब गंभीर आवाज में बोले—
“ये साधारण जिन्न नहीं है।”
“ये उससे मोहब्बत करने लगा है।”
कमरे में बैठे सभी लोग डर गए।
मौलवी साहब बोले—
“और अगर इसे रोका नहीं गया…
तो ये सना को हमेशा के लिए अपने साथ ले जाएगा।”
उस रात…
सना अपने कमरे में अकेली बैठी थी।
बाहर बारिश हो रही थी।
अचानक कमरे की लाइट बंद हो गई।
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
और तभी…
उसके कान के पास किसी ने फुसफुसाया—
“मैं फिर आ गया पूरा नूराबाद गांव अब डर के साए में जी रहा था।
हर गली…
हर घर…
हर चाय की दुकान पर सिर्फ एक ही चर्चा थी—
“सना पर जिन्न का साया है।”
कुछ लोग कहते—
“उसे पुराने कब्रिस्तान में कुछ मिला था।”
कुछ कहते—
“किसी ने उस पर काला जादू करवाया है।”
लेकिन सच्चाई कोई नहीं जानता था।
उधर सना दिन-ब-दिन बदलती जा रही थी।
पहले वो शांत और मासूम लड़की थी…
लेकिन अब उसकी आंखों में अजीब सी उदासी और डर रहने लगा था।
सबसे डरावनी बात—
उसे रात में किसी के चलने की आवाजें सुनाई देती थीं।
कोई उसके कमरे के बाहर धीरे-धीरे चलता था…
“ठक… ठक… ठक…”
और जैसे ही वो दरवाजा खोलती…
बाहर कोई नहीं होता।
उसकी मां अब उसके कमरे के बाहर सोने लगी थीं।
उन्हें डर था कि कहीं सना खुद को नुकसान ना पहुंचा ले।
उस रात बाहर तेज बारिश हो रही थी।
आसमान में बिजली चमक रही थी।
सना अपने बिस्तर पर बैठी थी।
कमरे में हल्की पीली रोशनी जल रही थी।
लेकिन उसका चेहरा डरा हुआ था।
क्योंकि उसे बार-बार वही फुसफुसाहट सुनाई दे रही थी—
“सना…”
“मैं वापस आ गया…”
सना कांपने लगी।
उसने डरते हुए चारों तरफ देखा।
“क… कौन है?”
अचानक कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई।
तेज ठंडी हवा अंदर आने लगी।
परदे जोर-जोर से उड़ने लगे।
और तभी…
कमरे के अंधेरे कोने में काला धुआं दिखाई देने लगा।
धीरे-धीरे वो धुआं इंसान का आकार लेने लगा।
लंबा काला साया…
लाल चमकती आंखें…
और बेहद डरावनी मुस्कान।
सना डर गई।
लेकिन उसी पल उसके चेहरे पर अजीब शांति भी आ गई।
वो धीमी आवाज में बोली—
“अज़हान…”
काला साया धीरे-धीरे उसके करीब आने लगा।
कमरे का तापमान अचानक बहुत ठंडा हो गया।
दीवारों पर टंगी तस्वीरें हिलने लगीं।
अज़हान की आवाज गूंजने लगी—
“तुमने मुझे याद किया था…”
सना की आंखें नम हो गईं।
“तुम मुझे छोड़कर क्यों चले गए थे?”
अज़हान कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर धीमी आवाज में बोला—
“क्योंकि इंसानों की दुनिया मुझे स्वीकार नहीं करती।”
सना रोने लगी।
“मुझे तुमसे डर लगता है… लेकिन फिर भी तुम्हारे बिना अच्छा नहीं लगता।”
अज़हान उसकी तरफ देखता रहा।
उसकी लाल आंखों में पहली बार दर्द दिखाई दे रहा था।
“मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा।”
अचानक बाहर जोर की बिजली कड़की।
और उसी समय सना की मां की नींद खुल गई।
उन्होंने महसूस किया…
कमरे के अंदर से किसी आदमी की आवाज आ रही थी।
वो घबरा गईं।
धीरे-धीरे दरवाजे के पास पहुंचीं।
अंदर से सना की आवाज आ रही थी—
“तुम इंसान क्यों नहीं हो अज़हान?”
मां के हाथ कांपने लगे।
उन्होंने तुरंत दरवाजा खोल दिया।
दरवाजा खुलते ही…
पूरा कमरा अचानक शांत हो गया।
हवा रुक गई।
खिड़की बंद हो गई।
लेकिन सबसे डरावनी चीज—
कमरे की दीवार पर लंबे जलते हुए हाथों के निशान बने हुए थे।
सना बिस्तर पर बैठी थी।
और उसके सामने हवा में हल्का काला धुआं घूम रहा था।
मां चीख पड़ीं।
सना घबराकर बोली—
“अम्मी नहीं!”
लेकिन तभी…
कमरे की सारी लाइटें एक साथ बंद हो गईं।
पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
अचानक एक भारी आवाज गूंजी—
“उसे मुझसे दूर मत करो…”
मां डर के मारे जमीन पर गिर गईं।
बाहर बारिश और तेज हो गई।
घर की खिड़कियां जोर-जोर से हिलने लगीं।
सना रोते हुए चिल्लाई—
“अज़हान बस करो!”
कुछ सेकंड बाद अचानक सब शांत हो गया।
लाइट वापस आ गई।
लेकिन अज़हान गायब हो चुका था।
उस रात के बाद गांव में दहशत और बढ़ गई।
अब लोग सना के घर के पास से गुजरने तक से डरने लगे।
कुछ औरतें कहने लगीं—
“ये लड़की अपशकुन है।”
बच्चों को उसके घर के पास जाने से मना कर दिया गया।
सना अंदर ही अंदर टूटने लगी।
उसे समझ नहीं आ रहा था…
जो उसके साथ हो रहा है वो प्यार है या डरावना श्राप।
अगली शाम मौलवी साहब फिर घर आए।
उन्होंने पूरे कमरे में आयत पढ़नी शुरू की।
लेकिन जैसे ही उन्होंने सना के सिर पर हाथ रखा…
उनका चेहरा बदल गया।
उन्होंने अचानक हाथ पीछे खींच लिया।
सना की आंखें धीरे-धीरे काली होने लगीं।
और उसके होंठ अपने आप हिलने लगे।
लेकिन आवाज किसी और की थी—
“उसे मुझसे अलग मत करो…”
मौलवी साहब ने सख्त आवाज में कहा—
“तू कौन है?”
सना के मुंह से भारी आवाज निकली—
“मैं अज़हान हूं।”
कमरे में बैठे सभी लोग कांपने लगे।
मौलवी साहब ने पूछा—
“तुझे इस लड़की से क्या चाहिए?”
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।
फिर आवाज आई—
“उसकी मोहब्बत…”
मौलवी साहब गंभीर हो गए।
“तुम जिन्न हो… और वो इंसान।
ये रिश्ता हराम है।”
अचानक पूरा कमरा जोर से कांप उठा।
दीवार पर टंगा शीशा टूट गया।
सना चीखने लगी।
उसकी आवाज अब इंसानी नहीं लग रही थी।
अज़हान गुस्से में गरजा—
“मैं उससे प्यार करता हूं!”
हवा में अचानक काला धुआं फैलने लगा।
मौलवी साहब ने जोर-जोर से आयत पढ़नी शुरू की।
लेकिन तभी…
सना अचानक हवा में कुछ इंच ऊपर उठ गई।
उसकी मां चीख पड़ीं।
पूरा कमरा जैसे किसी अदृश्य ताकत के कब्जे में था।
अज़हान की आवाज हर तरफ गूंज रही थी—
“अगर किसी ने उसे मुझसे दूर किया…
तो मैं पूरे गांव को बर्बाद कर दूंगा!”
इतना सुनते ही सभी के चेहरों का रंग उड़ गया।
मौलवी साहब ने कांपती आवाज में कहा—
“ये बहुत ताकतवर जिन्न है…”
फिर उन्होंने सना की मां को अलग ले जाकर धीरे से कहा—
“इसका संबंध बहुत पुराना है।”
मां घबराकर बोलीं—
“क्या मतलब?”
मौलवी साहब बोले—
“शायद ये जिन्न सना को बचपन से देख रहा था…”
मां के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उधर उसी रात…
सना अपने कमरे में अकेली बैठी रो रही थी।
तभी उसके सामने रखा पुराना शीशा अपने आप धुंधला होने लगा।
धीरे-धीरे उस शीशे में एक चेहरा दिखाई दिया।
वही लाल आंखें…
वही डरावनी मुस्कान…
अज़हान।
लेकिन इस बार उसके पीछे आग जल रही थी।
और उसके आसपास कई खतरनाक परछाइयां खड़ी थीं।
अज़हान धीरे से बोला—
“जल्द ही तुम्हें मेरे साथ चलना होगा…”
सना कांप गई।
“क… कहां?”
अज़हान की आंखें और लाल हो गईं।
और फिर उसने वो बात कही…
जिसे सुनकर सना की चीख निकल गई—
“जिन्नों की दुनिया में “जिन्नों की दुनिया में…”
अज़हान की ये बात सुनते ही सना का पूरा शरीर कांप उठा।
उसकी सांसें तेज हो गईं।
कमरे में रखा शीशा धीरे-धीरे काला पड़ने लगा।
और अगले ही पल…
धड़ाम!
शीशा अपने आप टूट गया।
सना डरकर पीछे हट गई।
पूरा कमरा अचानक बर्फ जैसा ठंडा हो गया था।
खिड़कियों से तेज हवा अंदर आ रही थी।
परदों के बीच जैसे कोई अदृश्य चीज घूम रही थी।
सना कांपती आवाज में बोली—
“मैं कहीं नहीं जाऊंगी…”
कुछ सेकंड तक कमरे में सन्नाटा रहा।
फिर अंधेरे से अज़हान की भारी आवाज गूंजी—
“तुम्हें आना होगा…”
“क्योंकि अब तुम सिर्फ इंसानों की नहीं रही…”
इतना सुनते ही कमरे की दीवारों पर काले निशान उभरने लगे।
जैसे किसी ने जलते हुए हाथों से दीवार छुई हो।
सना डर के मारे रोने लगी।
“मुझे छोड़ दो…”
लेकिन तभी अचानक उसके सामने काला धुआं इकट्ठा होने लगा।
धीरे-धीरे अज़हान का चेहरा दिखाई देने लगा।
आज वो पहले से ज्यादा डरावना लग रहा था।
लंबा काला शरीर…
लाल चमकती आंखें…
चेहरे पर गुस्सा और दर्द दोनों।
लेकिन सबसे अजीब बात—
उसकी आंखों में इंसानों जैसी उदासी थी।
अज़हान धीरे-धीरे सना के करीब आया।
“मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता…”
सना रोते हुए बोली—
“तो फिर मुझे डराते क्यों हो?”
अज़हान कुछ पल चुप रहा।
फिर धीमी आवाज में बोला—
“क्योंकि मेरे पास बहुत कम समय बचा है…”
सना समझ नहीं पाई।
“क्या मतलब?”
अज़हान ने जवाब नहीं दिया।
उसने बस धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया।
उसका हाथ पूरी तरह धुएं जैसा था…
लेकिन फिर भी उसमें अजीब गर्मी महसूस हो रही थी।
सना डरते हुए पीछे हट गई।
तभी नीचे से उसकी मां की आवाज आई—
“सना!”
अज़हान अचानक पीछे हट गया।
उसकी आंखें गुस्से से लाल हो गईं।
“उन्हें हमारे बीच मत आने दो…”
और अगले ही पल वो गायब हो गया।
सना की मां कमरे में दौड़ती हुई आईं।
उन्होंने देखा…
कमरे की हालत पूरी तरह बिगड़ी हुई थी।
टूटा हुआ शीशा…
दीवारों पर काले निशान…
और सना डरी हुई कोने में बैठी रो रही थी।
मां उसे गले लगाकर रोने लगीं।
“या अल्लाह… हमारी मदद कर…”
अगले दिन पूरे गांव में डर फैल चुका था।
अब लोग यकीन करने लगे थे कि सना के घर में सचमुच कोई जिन्न है।
कुछ लोगों ने तो घर के सामने से गुजरना तक बंद कर दिया।
बच्चे डर के मारे रात में बाहर नहीं निकलते थे।
उधर गांव के कुछ बूढ़े लोग मस्जिद में इकट्ठा हुए।
उनमें हर कोई डरा हुआ था।
एक बूढ़ा आदमी बोला—
“अगर वो जिन्न गुस्से में आ गया… तो पूरे गांव पर आफत आ जाएगी।”
दूसरा बोला—
“हमें उस लड़की को गांव से बाहर भेज देना चाहिए।”
इतना सुनते ही सना की मां रो पड़ीं।
“मेरी बेटी ने किसी का क्या बिगाड़ा है?”
लेकिन डर इंसान से कुछ भी करवा देता है।
धीरे-धीरे गांव वाले सना से नफरत करने लगे।
उधर सना अब खुद को अकेला महसूस करने लगी थी।
वो ना पूरी तरह इंसानों के साथ थी…
ना जिन्नों की दुनिया का हिस्सा।
उस रात…
आसमान बिल्कुल साफ था।
पूरा गांव सो चुका था।
लेकिन सना की आंखों में नींद नहीं थी।
वो छत पर अकेली बैठी चांद को देख रही थी।
ठंडी हवा चल रही थी।
तभी अचानक उसके पीछे किसी के कदमों की आवाज आई।
“ठक… ठक…”
सना धीरे-धीरे पीछे मुड़ी।
और उसका दिल जोर से धड़क उठा।
अज़हान उसके पीछे खड़ा था।
लेकिन आज वो अलग लग रहा था।
उसका चेहरा पहले जितना डरावना नहीं था।
उसने लंबा काला कुर्ता पहन रखा था।
बाल हवा में उड़ रहे थे।
और उसकी लाल आंखें आज शांत थीं।
सना धीरे से बोली—
“तुम इंसानों की तरह क्यों दिख रहे हो?”
अज़हान हल्का सा मुस्कुराया।
“क्योंकि तुम्हें मेरा असली रूप डराता है।”
कुछ पल दोनों चुप रहे।
फिर सना ने धीरे से पूछा—
“तुम आखिर चाहते क्या हो?”
अज़हान की मुस्कान गायब हो गई।
उसने आसमान की तरफ देखा।
“मैं तुम्हें बचाना चाहता हूं।”
सना हैरान रह गई।
“मुझसे?”
अज़हान ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“अपनी दुनिया से…”
सना कुछ समझ नहीं पाई।
“तुम्हारी दुनिया?”
अज़हान की आंखों में अचानक डर दिखाई देने लगा।
पहली बार।
“जिन्नों की दुनिया में कुछ बहुत बुरा होने वाला है…”
हवा अचानक तेज हो गई।
अज़हान की आवाज धीमी हो गई।
“और उन्होंने तुम्हें चुन लिया है।”
सना का दिल बैठ गया।
“क… किसने?”
अज़हान ने जवाब देने से पहले चारों तरफ देखा।
जैसे कोई उन्हें देख रहा हो।
फिर उसने धीरे से कहा—
“जिन्नों का बादशाह…”
इतना सुनते ही अचानक आसमान में जोर की बिजली चमकी।
और उसी पल…
छत के चारों तरफ काले साये दिखाई देने लगे।
दर्जनों लाल आंखें अंधेरे में चमक रही थीं।
सना डरकर अज़हान के पीछे छिप गई।
अज़हान गुस्से में गरजा—
“पीछे हटो!”
अचानक पूरा माहौल कांप उठा।
चारों तरफ से डरावनी आवाजें आने लगीं।
“इंसानी लड़की को हमारे हवाले कर दो…”
“वो अब हमारी है…”
सना कांपने लगी।
उसने पहली बार इतने सारे जिन्न देखे थे।
काले साये…
लंबे पंजे…
जलती हुई आंखें…
और इंसानों जैसी नहीं लगने वाली मुस्कान।
अज़हान ने सना को अपने पीछे कर लिया।
उसकी आंखें अब आग की तरह लाल हो चुकी थीं।
“कोई इसे छू नहीं सकता!”
अचानक एक विशाल काला साया हवा में उभरा।
बाकी सारे जिन्न उसके सामने झुक गए।
उसकी आवाज इतनी भारी थी कि पूरी छत हिलने लगी।
“अज़हान…”
“तुमने जिन्नों के नियम तोड़े हैं…”
सना डर से कांपने लगी।
अज़हान गुर्राया—
“मैं उसे तुम्हारे हवाले नहीं करूंगा!”
विशाल साया हंसा।
उसकी हंसी इंसानी नहीं थी।
“तुम एक इंसानी लड़की के लिए अपनी दुनिया से लड़ोगे?”
अज़हान की आंखों में गुस्सा भर गया।
“अगर जरूरत पड़ी… तो हां।”
सना ये सब सुनकर हैरान थी।
उसे पहली बार महसूस हुआ…
अज़हान सिर्फ डरावना जिन्न नहीं था।
वो सच में उससे प्यार करता था।
लेकिन तभी वो विशाल साया धीरे-धीरे सना की तरफ बढ़ा।
और उसकी आवाज गूंजी—
“लड़की…”
“तुम्हें जल्द ही हमारे साथ चलना होगा…”
“क्योंकि तुम्हारे अंदर वो निशान जाग चुका है…”
सना डर गई।
“कौन सा निशान?”
अचानक उसकी गर्दन के पीछे जलन होने लगी।
वो दर्द से चीख पड़ी।
अज़हान घबरा गया।
सना जमीन पर गिर गई।
उसकी गर्दन के पीछे धीरे-धीरे एक काला निशान उभरने लगा।
अजीब सा चिन्ह…
जो लाल रोशनी में चमक रहा था।
बाकी सारे जिन्न एक साथ डरावनी आवाज में बोले—
“दरवाज़ा खुलने वाला है…”
सना की आंखें डर से फैल गईं।
उसे समझ नहीं आ रहा था…
उसके शरीर पर ये निशान कैसे आया…
और आखिर कौन सा दरवाज़ा खुलने वाला था।
लेकिन सबसे डरावनी बात अभी बाकी थी…
क्योंकि उसी समय गांव के पुराने कब्रिस्तान में…
जमीन अपने आप फटने लगी थी नूराबाद गांव की उस रात को शायद ही कोई कभी भूल पाए।
आधी रात का समय था।
पूरा गांव गहरी नींद में डूबा हुआ था…
लेकिन गांव के बाहर पुराने कब्रिस्तान में कुछ भयानक हो रहा था।
आसमान काले बादलों से भर चुका था।
तेज हवाएं चल रही थीं।
पेड़ ऐसे हिल रहे थे जैसे कोई अदृश्य ताकत उन्हें जड़ से उखाड़ देना चाहती हो।
और तभी…
कब्रिस्तान के बीचों-बीच जमीन धीरे-धीरे फटने लगी।
“चर्रररर…”
मिट्टी अपने आप अलग होने लगी।
पुरानी कब्रों के पत्थर टूटकर गिरने लगे।
हवा में अजीब फुसफुसाहट गूंज रही थी।
“दरवाज़ा खुल रहा है…”
“वो लौट रही है…”
“इंसानी लड़की चुनी जा चुकी है…”
अचानक जमीन के अंदर से लाल रोशनी निकलने लगी।
धीरे-धीरे वहां एक विशाल गोल निशान बन गया।
उस निशान के बीचों-बीच काला धुआं घूम रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे जमीन के नीचे कोई दूसरी दुनिया छिपी हो।
उधर सना अपने घर की छत पर दर्द से तड़प रही थी।
उसकी गर्दन के पीछे बना काला निशान अब चमकने लगा था।
अज़हान घबराया हुआ उसके पास बैठा था।
पहली बार उसके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
सना दर्द में रोते हुए बोली—
“ये क्या हो रहा है मेरे साथ?”
अज़हान ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
लेकिन जैसे ही उसने सना की गर्दन के पास हाथ रखा…
उसका हाथ जलने लगा।
वो पीछे हट गया।
उसकी आंखों में हैरानी भर गई।
“नहीं… ये नहीं हो सकता…”
सना कांपती आवाज में बोली—
“क्या?”
अज़हान धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।
उसके चेहरे पर डर और दुख दोनों थे।
“तुम सिर्फ एक इंसान नहीं हो…”
सना की सांस रुक गई।
“मतलब?”
अज़हान कुछ पल चुप रहा।
फिर भारी आवाज में बोला—
“तुम्हारा संबंध बहुत पुराने जिन्नी खून से है।”
हवा अचानक और तेज हो गई।
सना समझ नहीं पा रही थी।
“मैं इंसान हूं…”
अज़हान ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा—
“आधा इंसान…”
“और आधा…”
वो रुक गया।
सना डरते हुए बोली—
“आधा क्या?”
अज़हान की लाल आंखें चमक उठीं।
“जिन्न।”
ये सुनते ही सना के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“नहीं… ये झूठ है…”
वो रोने लगी।
“मैं इंसान हूं!”
अज़हान दर्द भरी आवाज में बोला—
“काश ये झूठ होता…”
उसी समय नीचे कमरे में सना की मां की नींद खुल गई।
उन्होंने ऊपर से अजीब आवाजें सुनीं।
जैसे कई लोग एक साथ फुसफुसा रहे हों।
वो डरते हुए छत की तरफ दौड़ीं।
लेकिन जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला…
उनकी चीख निकल गई।
छत पर दर्जनों काले साये खड़े थे।
लाल आंखें…
लंबे पंजे…
डरावनी मुस्कान।
और उनके बीच सना खड़ी थी।
उसकी गर्दन का निशान लाल रोशनी में चमक रहा था।
सना की मां कांपने लगीं।
अज़हान तुरंत उनके सामने आ गया।
“पीछे हटो!”
बाकी जिन्न गुर्राने लगे।
तभी उनमें से एक बूढ़ा जिन्न आगे आया।
उसका चेहरा आधा जला हुआ था।
आवाज बहुत भारी थी।
“समय आ चुका है…”
अज़हान गुस्से में बोला—
“अभी नहीं!”
बूढ़ा जिन्न हंसा।
“दरवाज़ा खुल चुका है।”
“अब उसे हमारे साथ चलना ही होगा।”
सना डरकर पीछे हट गई।
“मैं कहीं नहीं जाऊंगी!”
अचानक उसकी गर्दन का निशान तेज चमकने लगा।
वो दर्द से चीख पड़ी।
और तभी…
उसकी आंखों के सामने अजीब दृश्य आने लगे।
पुरानी आग…
एक विशाल महल…
काले कपड़ों में जिन्न…
और एक औरत…
जो बिल्कुल सना जैसी दिखती थी।
सना डर गई।
उसने सिर पकड़ लिया।
“ये कौन है?!”
अज़हान की आवाज भारी हो गई।
“तुम्हारी मां…”
सना चौंक गई।
“मेरी मां नीचे हैं!”
अज़हान धीरे से बोला—
“तुम्हारी असली मां…”
पूरा माहौल अचानक शांत हो गया।
सना की सांसें तेज हो गईं।
उसे लग रहा था उसका दिमाग फट जाएगा।
“न… नहीं…”
अज़हान बोला—
“सालों पहले जिन्नों और इंसानों की दुनिया के बीच युद्ध हुआ था।”
“उस समय जिन्नों की रानी ने अपनी बच्ची को बचाने के लिए इंसानों की दुनिया में भेज दिया।”
सना कांपती आवाज में बोली—
“तुम कहना क्या चाहते हो?”
अज़हान की आंखें नम हो गईं।
“वो बच्ची तुम थी…”
सना की दुनिया जैसे रुक गई।
उसके कान सुन्न पड़ गए।
उसकी मां रोते हुए बोलीं—
“नहीं! ये झूठ है!”
अज़हान धीरे से उनकी तरफ देखने लगा।
“आपको वो रात याद है… जब आपने इसे कब्रिस्तान के पास पाया था?”
सना की मां का चेहरा सफेद पड़ गया।
उनके हाथ कांपने लगे।
सना हैरान रह गई।
“अम्मी…?”
मां की आंखों से आंसू बहने लगे।
वो जमीन पर बैठ गईं।
“मैंने इसे जन्म नहीं दिया था…”
सना का दिल टूट गया।
“क्या…?”
मां रोते हुए बोलीं—
“20 साल पहले हमें ये बच्ची पुराने कब्रिस्तान के पास मिली थी…”
“उस रात बहुत तेज तूफान था…”
“और इसके गले में यही निशान था…”
सना की आंखों से आंसू बहने लगे।
उसे लग रहा था जैसे उसकी पूरी जिंदगी झूठ थी।
अज़हान धीरे से बोला—
“जिन्नों का बादशाह तुम्हें वापस चाहता है।”
सना डर गई।
“क्यों?”
अचानक आसमान में जोर की बिजली चमकी।
और उसी पल…
छत के ऊपर एक विशाल काला भंवर दिखाई देने लगा।
उसके अंदर लाल आग घूम रही थी।
बाकी सारे जिन्न एक साथ झुक गए।
और फिर…
उस भंवर से एक डरावनी आवाज गूंजी—
“क्योंकि वही अगली रानी है…”
पूरा गांव कांप उठा।
सना डर से जम गई।
अज़हान गुस्से में चिल्लाया—
“उसे अकेला छोड़ दो!”
लेकिन उसी समय काला भंवर और बड़ा होने लगा।
पूरा आसमान लाल हो गया।
गांव के लोग घरों से बाहर निकल आए।
सब डर के मारे आसमान देखने लगे।
मौलवी साहब भी वहां पहुंच गए।
उन्होंने आसमान देखकर कांपती आवाज में कहा—
“या अल्लाह…”
“जिन्नों की दुनिया का दरवाज़ा खुल चुका है…”
उधर सना अब रो रही थी।
उसे समझ नहीं आ रहा था…
वो इंसान है…
या जिन्नों की दुनिया का हिस्सा।
लेकिन सबसे डरावनी बात अभी बाकी थी।
क्योंकि उसी समय…
उस काले भंवर के अंदर से दो विशाल लाल आंखें खुलीं।
और एक आवाज पूरे गांव में गूंजी—
“मेरी बेटी को मेरे पास भेज दो मेरी बेटी को मेरे पास भेज दो…”
जैसे ही आसमान से वो डरावनी आवाज गूंजी…
पूरा नूराबाद गांव कांप उठा।
लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।
किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आसमान लाल कैसे हो गया।
बच्चे रोने लगे।
औरतें दुआएं पढ़ने लगीं।
पुरुष डरकर मस्जिद की तरफ भागने लगे।
उधर सना की हालत खराब थी।
उसके कानों में लगातार अजीब आवाजें गूंज रही थीं।
“वापस आओ…”
“तुम हमारी हो…”
“तुम्हें जिन्नों की दुनिया संभालनी होगी…”
सना ने दोनों कान बंद कर लिए।
“बस करो!”
लेकिन आवाजें रुक नहीं रही थीं।
उसकी गर्दन का निशान अब आग की तरह जलने लगा।
अज़हान तुरंत उसके पास आया।
उसने सना को संभाला।
“सना… मेरी तरफ देखो!”
सना रो रही थी।
“मैं कौन हूं अज़हान?!”
“इंसान… या जिन्न?!”
अज़हान कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने धीरे से कहा—
“तुम दोनों हो…”
सना की आंखों से आंसू बहते रहे।
“तो मेरी असली दुनिया कौन सी है?”
अज़हान ने आसमान की तरफ देखा।
काला भंवर अब और विशाल हो चुका था।
उसके अंदर आग घूम रही थी।
और उस आग के बीच दो लाल आंखें लगातार सना को देख रही थीं।
अज़हान भारी आवाज में बोला—
“तुम्हारी दुनिया वही है… जहां तुम्हारा दिल है।”
सना चुप हो गई।
पहली बार उसे महसूस हुआ…
कि इंसानों ने उसे प्यार दिया था।
उसकी मां…
उसका गांव…
उसकी जिंदगी…
सब इंसानों के साथ थी।
लेकिन तभी अचानक आसमान में जोर का धमाका हुआ।
“धड़ाम!!!”
पूरा गांव हिल गया।
काले भंवर के अंदर से धीरे-धीरे एक विशाल दरवाज़ा दिखाई देने लगा।
जलती हुई लाल आग से बना हुआ दरवाज़ा।
उस दरवाज़े के दोनों तरफ डरावने जिन्न खड़े थे।
और फिर…
उस दरवाज़े से एक औरत बाहर निकली।
लंबा काला लिबास…
हवा में उड़ते सफेद बाल…
लाल चमकती आंखें…
और चेहरे पर अजीब दर्द।
बाकी सारे जिन्न उसके सामने झुक गए।
अज़हान भी गंभीर हो गया।
उसने धीरे से कहा—
“जिन्नों की रानी…”
सना डर गई।
लेकिन जैसे ही उस औरत की नजर सना पर पड़ी…
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
वो धीरे-धीरे नीचे उतरी।
पूरा गांव डर के मारे पीछे हट गया।
सना कांपती आवाज में बोली—
“तुम… कौन हो?”
औरत की आंखें भर आईं।
“मैं तुम्हारी मां हूं…”
सना जैसे पत्थर की हो गई।
उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।
जिन्नों की रानी धीरे-धीरे उसके करीब आई।
“20 साल पहले इंसानों और जिन्नों के बीच भयानक युद्ध हुआ था।”
“उस युद्ध में तुम्हें मारने की कोशिश की गई…”
“क्योंकि भविष्यवाणी थी कि आधा इंसान और आधा जिन्न बच्चा दोनों दुनियाओं को जोड़ सकता है।”
सना की सांसें रुकने लगीं।
रानी बोली—
“तुम्हें बचाने के लिए मैंने तुम्हें इंसानों की दुनिया में भेज दिया…”
सना रोने लगी।
“तो आपने मुझे छोड़ दिया?”
रानी की आंखों में दर्द था।
“मां कभी अपने बच्चे को खुशी से नहीं छोड़ती…”
उधर सना की इंसानी मां रो रही थीं।
उन्हें लग रहा था जैसे कोई उनकी बेटी उनसे छीन रहा हो।
सना दोनों तरफ देखने लगी।
एक तरफ उसकी असली जिन्न मां…
दूसरी तरफ वो इंसानी मां जिसने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया।
उसका दिल टूटने लगा।
अचानक जिन्नों का बादशाह आसमान में दिखाई दिया।
विशाल काला शरीर…
आग जैसी आंखें…
और बेहद डरावनी आवाज।
“समय खत्म हो चुका है…”
“लड़की को जिन्नों की दुनिया में आना होगा!”
पूरा गांव कांप उठा।
अज़हान गुस्से में आगे आया।
“वो कहीं नहीं जाएगी!”
बादशाह की आंखें लाल हो गईं।
“तुम एक इंसानी लड़की के लिए हमारे खिलाफ खड़े हो?”
अज़हान गरजा—
“मैं उससे प्यार करता हूं!”
अचानक हवा में आग की लपटें उठने लगीं।
बाकी जिन्न गुस्से में चिल्लाने लगे।
“गद्दार!”
“अज़हान ने नियम तोड़े हैं!”
सना डर गई।
उसे लग रहा था सब कुछ खत्म हो जाएगा।
तभी जिन्नों के बादशाह ने हाथ उठाया।
और अगले ही पल…
अज़हान हवा में उछलकर दूर जा गिरा।
उसके शरीर से काला धुआं निकलने लगा।
सना चीख पड़ी—
“अज़हान!”
वो दौड़कर उसके पास गई।
अज़हान कमजोर आवाज में बोला—
“डरो मत…”
लेकिन उसकी आंखों की लाल चमक धीरे-धीरे कम हो रही थी।
सना रोने लगी।
“तुम्हें कुछ नहीं होगा!”
उधर बादशाह की आवाज गूंजी—
“अगर वो हमारे साथ नहीं आई…
तो पूरा गांव जल जाएगा।”
अचानक गांव के कई घरों में आग लगने लगी।
लोग चीखने लगे।
चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।
सना की आंखों में डर भर गया।
उसने पहली बार महसूस किया…
अगर उसने फैसला नहीं लिया…
तो पूरा गांव खत्म हो जाएगा।
उसकी इंसानी मां रोते हुए बोलीं—
“बेटी मत जा…”
लेकिन जिन्नों की रानी की आंखों में भी दर्द था।
“अगर ये नहीं आई… तो बादशाह इसे कभी नहीं छोड़ेगा…”
सना रोने लगी।
उसका दिल दो दुनियाओं के बीच फंस चुका था।
तभी घायल अज़हान ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“सना…”
“तुम्हें अपनी किस्मत खुद चुननी होगी…”
सना की आंखों से आंसू गिरते रहे।
उसने पूरे गांव की तरफ देखा।
डरे हुए लोग…
रोते बच्चे…
जलते घर…
और अपनी मां।
फिर उसने धीरे-धीरे आसमान की तरफ देखा।
उसकी आंखों में अब डर नहीं था।
सिर्फ फैसला था।
सना धीरे-धीरे जिन्नों के बादशाह के सामने गई।
पूरा गांव चुप हो गया।
सना भारी आवाज में बोली—
“मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूं…”
उसकी मां चीख पड़ीं—
“नहीं!”
लेकिन तभी सना ने हाथ उठाया।
“लेकिन मेरी एक शर्त है।”
बादशाह की आंखें सिकुड़ गईं।
“क्या?”
सना की आवाज गूंज उठी—
“आज के बाद कोई जिन्न इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।”
पूरा माहौल शांत हो गया।
बादशाह हंस पड़ा।
“और अगर मैं मना कर दूं?”
सना की गर्दन का निशान अचानक चमकने लगा।
इतना तेज कि पूरा आसमान रोशन हो गया।
बाकी सारे जिन्न डर गए।
जिन्नों की रानी भी हैरान रह गईं।
अज़हान धीरे से मुस्कुराया।
“उसे अपनी असली ताकत मिल गई…”
अचानक सना हवा में उठने लगी।
उसकी आंखें सफेद रोशनी से चमकने लगीं।
पूरा आसमान कांप उठा।
सना की आवाज अब पहले जैसी नहीं थी।
उसमें इंसानों की नरमी और जिन्नों की ताकत दोनों थीं।
“मैं दोनों दुनियाओं की बेटी हूं…”
“और अब किसी निर्दोष को नुकसान नहीं होगा।”
अचानक काला भंवर टूटने लगा।
जिन्नों का बादशाह गुस्से में गरजा।
लेकिन उसी समय तेज सफेद रोशनी पूरे आसमान में फैल गई।
बाकी सारे जिन्न पीछे हट गए।
कुछ सेकंड बाद…
सब शांत हो गया।
आसमान फिर से सामान्य हो चुका था।
काला दरवाज़ा गायब हो गया।
आग बुझ गई।
और जिन्नों का बादशाह हमेशा के लिए बंद हो चुका था।
सना धीरे-धीरे जमीन पर गिरने लगी।
लेकिन अज़हान ने उसे पकड़ लिया।
सना कमजोर मुस्कान के साथ बोली—
“सब खत्म हो गया?”
अज़हान की आंखों में आंसू थे।
“हां…”
लेकिन तभी उसका शरीर धीरे-धीरे धुएं में बदलने लगा।
सना डर गई।
“अज़हान?!”
अज़हान मुस्कुराया।
“जिन्नों की दुनिया का दरवाज़ा बंद हो चुका है…”
“अब मैं यहां नहीं रह सकता…”
सना रोने लगी।
“मुझे छोड़कर मत जाओ…”
अज़हान ने धीरे से उसके आंसू पोंछे।
“कुछ मोहब्बतें पूरी नहीं होतीं…”
“लेकिन कभी खत्म भी नहीं होतीं…”
और अगले ही पल…
वो धुएं में बदलकर गायब हो गया।
सना फूट-फूटकर रोने लगी।
उधर धीरे-धीरे सूरज निकलने लगा।
नूराबाद गांव बच चुका था।
कुछ महीनों बाद…
सना सामान्य जिंदगी जीने लगी।
लेकिन हर रात…
वो छत पर जाकर आसमान जरूर देखती।
क्योंकि उसे अब भी लगता था…
कहीं ना कहीं…
अज़हान उसे अब भी देख रहा है


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