बूढ़े आदमी से शादी
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में पूजा नाम की एक खूबसूरत लड़की रहती थी।
गरीब परिवार था…
पिता खेतों में मजदूरी करते थे।
पूजा पढ़ना चाहती थी…
अपने सपने पूरे करना चाहती थी…
लेकिन घर की हालत बहुत खराब थी।
एक दिन गाँव का अमीर बूढ़ा आदमी “ठाकुर हरिराम” पूजा के घर आया।
उसकी उम्र लगभग 60 साल थी।
सफेद बाल…
भारी आवाज…
और चेहरे पर घमंड।
उसने पूजा के पिता से कहा—
“अपनी बेटी की शादी मुझसे कर दो… बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज चुका दूँगा।”
ये सुनते ही पूजा के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वो रोते हुए बोली—
“बाबा… मैं ये शादी नहीं करूँगी…”
लेकिन उसके पिता मजबूर थे।
उन्होंने रोते हुए कहा—
“बेटी… हमारे पास और कोई रास्ता नहीं है…”
पूजा पूरी रात रोती रही।
उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी जिंदगी खत्म हो गई हो।
कुछ दिनों बाद पूरे गाँव में शादी की तैयारी शुरू हो गई।
ढोल बज रहे थे…
लोग नाच रहे थे…
लेकिन दुल्हन के कमरे में सिर्फ आँसू थे।
शादी वाले दिन पूजा लाल जोड़े में बैठी थी।
उसकी आँखें लगातार रोने से लाल हो चुकी थीं।
उधर बूढ़ा हरिराम शेरवानी पहनकर घोड़ी पर बैठा मुस्कुरा रहा था।
गाँव वाले बस पैसों की चमक देख रहे थे…
किसी को पूजा का दर्द नहीं दिख रहा था।
फेरे शुरू हुए।
हर फेरे के साथ पूजा को लग रहा था जैसे उसके सारे सपने टूट रहे हों।
शादी के बाद पूजा हरिराम के बड़े हवेली जैसे घर में आ गई।
घर बहुत बड़ा था…
लेकिन उसमें अपनापन बिल्कुल नहीं था।
हरिराम बहुत गुस्से वाला आदमी था।
छोटी-छोटी बात पर चिल्लाता।
पूजा हमेशा डरी हुई रहती।
एक रात पूजा चुपचाप छत पर बैठकर रो रही थी।
तभी पीछे से आवाज आई—
“तुम खुश नहीं हो ना?”
पूजा ने पीछे मुड़कर देखा।
वो हरिराम का नौकर “अर्जुन” था।
उम्र में पूजा जितना…
सीधा-सादा और अच्छा लड़का।
पूजा कुछ नहीं बोली।
लेकिन उसकी आँखों के आँसू सब बता रहे थे।
धीरे-धीरे अर्जुन और पूजा की बातें होने लगीं।
अर्जुन उसे हँसाने की कोशिश करता…
उसका दर्द समझता…
और पहली बार पूजा को लगा कि कोई उसकी परवाह करता है।
लेकिन उसे नहीं पता था…
कि उनकी ये दोस्ती आगे चलकर पूरी हवेली में तूफान लाने वाली थी धीरे-धीरे पूजा और अर्जुन की बातें बढ़ने लगीं।
दिन में जब हरिराम खेतों या बाजार जाता…
तब अर्जुन चुपके से पूजा के लिए चाय लेकर आता।
पूजा पहली बार किसी के सामने खुलकर मुस्कुराने लगी थी।
अर्जुन हमेशा उससे कहता—
“तुम्हारी उम्र हँसने की है… रोने की नहीं…”
ये बातें पूजा के दिल को छू जाती थीं।
एक दिन बारिश हो रही थी।
पूजा हवेली के आँगन में अकेली खड़ी थी।
तभी उसका पैर फिसल गया।
वो गिरने ही वाली थी कि अर्जुन ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
दोनों कुछ सेकंड तक एक-दूसरे को देखते रहे।
पूजा का दिल तेजी से धड़कने लगा।
अर्जुन धीरे से बोला—
“संभलकर…”
उस दिन के बाद दोनों के बीच कुछ बदल गया।
अब उनकी आँखें भी बातें करने लगी थीं।
लेकिन ये रिश्ता गलत था…
बहुत गलत…
क्योंकि पूजा किसी और की पत्नी थी।
एक रात पूजा छत पर बैठी रो रही थी।
अर्जुन उसके पास आया।
“फिर रो रही हो?”
पूजा टूट चुकी थी।
वो रोते हुए बोली—
“मैं इस शादी में घुट रही हूँ अर्जुन…”
“मैंने कभी ये जिंदगी नहीं चाही…”
अर्जुन चुपचाप उसकी बातें सुनता रहा।
फिर धीरे से बोला—
“अगर मैं तुम्हें यहाँ से दूर ले जाऊँ तो… चलोगी?”
पूजा उसकी तरफ देखने लगी।
उसकी आँखों में पहली बार उम्मीद दिखाई दी।
लेकिन तभी नीचे से हरिराम की जोरदार आवाज आई—
“पूजा!!!”
दोनों डर गए।
पूजा जल्दी से नीचे भागी।
जैसे ही वो कमरे में पहुँची…
हरिराम गुस्से में खड़ा था।
“इतनी रात को छत पर क्या कर रही थी?!”
पूजा डर गई।
“वो… बस ऐसे ही…”
तभी हरिराम की नजर दूर खड़े अर्जुन पर पड़ी।
उसकी आँखें शक से भर गईं।
वो धीरे-धीरे अर्जुन की तरफ बढ़ा।
“तू यहाँ क्या कर रहा था?”
अर्जुन घबरा गया।
“मालिक… मैं बस पानी रखने आया था…”
हरिराम कुछ सेकंड तक उसे घूरता रहा।
फिर गुस्से में बोला—
“आज के बाद पूजा के आसपास भी दिखा… तो जिंदा नहीं छोड़ूँगा!”
अर्जुन चुपचाप सिर झुकाकर वहाँ से चला गया।
उस रात पूजा पूरी रात सो नहीं पाई।
उसे डर लग रहा था…
कहीं हरिराम को सब सच पता ना चल जाए…
लेकिन उसे ये नहीं पता था…
कि हरिराम अब उन दोनों पर नजर रखना शुरू कर चुका था अब हवेली का माहौल बदल चुका था।
हरिराम हर समय पूजा और अर्जुन पर नजर रखने लगा था।
पूजा जब भी अर्जुन से बात करती…
उसे डर लगता कि कहीं कोई देख ना ले।
लेकिन मोहब्बत छुपाए नहीं छुपती…
एक दिन दोपहर में हरिराम अचानक घर जल्दी लौट आया।
पूजा और अर्जुन आँगन में बात कर रहे थे।
अर्जुन पूजा से कह रहा था—
“बस थोड़ा इंतजार करो… मैं तुम्हें यहाँ से दूर ले जाऊँगा…”
तभी पीछे से जोरदार आवाज आई—
“कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी!”
दोनों घबरा गए।
उन्होंने पीछे मुड़कर देखा…
हरिराम गुस्से से लाल खड़ा था।
उसकी आँखों में आग थी।
पूजा डर के मारे काँपने लगी।
अर्जुन तुरंत बोला—
“मालिक… आप गलत समझ रहे हैं…”
लेकिन हरिराम ने उसे जोरदार थप्पड़ मार दिया।
“चुप!”
पूजा रोते हुए बोली—
“इनकी कोई गलती नहीं है!”
हरिराम और गुस्से में आ गया।
“तो मतलब सब सच है?!”
पूरा घर सन्नाटे में डूब गया।
हरिराम ने नौकरों को आवाज लगाई—
“इसे बाँध दो!”
दो आदमी तुरंत आए और अर्जुन को पकड़ लिया।
पूजा चीखने लगी—
“नहीं! इसे छोड़ दो!”
लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।
हरिराम गुस्से में अर्जुन के पास गया।
“मेरे ही घर में… मेरी बीवी पर नजर डालता है?!”
फिर उसने लाठी उठाई और अर्जुन को मारना शुरू कर दिया।
पूजा रो-रोकर चीख रही थी।
“मत मारो इसे! प्लीज़!”
लेकिन हरिराम का गुस्सा रुक नहीं रहा था।
अर्जुन के चेहरे से खून निकलने लगा।
फिर हरिराम ने पूजा की तरफ देखा।
“और तू…”
“तुझे मैंने गरीबी से निकालकर रानी बनाकर रखा… और तूने मुझे धोखा दिया!”
पूजा रोते हुए बोली—
“मैंने कभी आपसे प्यार नहीं किया…”
ये सुनते ही हरिराम का चेहरा और खतरनाक हो गया।
उसने गुस्से में पूजा को कमरे में बंद कर दिया।
बाहर से ताला लगा दिया।
पूजा दरवाजा पीटती रही…
“मुझे बाहर निकालो!”
लेकिन कोई नहीं आया।
उधर अर्जुन को हवेली से बाहर फेंक दिया गया।
बारिश हो रही थी।
वो घायल हालत में जमीन पर पड़ा था।
लेकिन उसके दिमाग में सिर्फ पूजा थी।
वो खुद से बोला—
“मैं पूजा को यहाँ से निकालकर रहूँगा…”
उसे नहीं पता था…
कि हरिराम अब एक बहुत खतरनाक फैसला लेने वाला था पूजा कमरे में बंद थी।
वो लगातार रो रही थी।
बाहर तेज बारिश हो रही थी…
और हवेली के अंदर डरावना सन्नाटा था।
उधर अर्जुन घायल हालत में गाँव के बाहर पुराने मंदिर में बैठा था।
उसके शरीर पर चोट के निशान थे…
लेकिन उसके दिल में सिर्फ पूजा को बचाने की चिंता थी।
रात के करीब बारह बजे हवेली की एक बूढ़ी नौकरानी चुपके से पूजा के कमरे के पास आई।
उसने धीरे से दरवाजा खोला।
पूजा हैरान रह गई।
नौकरानी बोली—
“बेटी… जल्दी यहाँ से भाग जा…”
“मालिक बहुत गुस्से में हैं… वो कल तुम्हारी दूसरी जगह भेजने की बात कर रहे थे…”
पूजा डर गई।
“कहाँ भेजेंगे मुझे?”
नौकरानी की आँखें भर आईं।
“शायद शहर… हमेशा के लिए…”
इतना सुनते ही पूजा घबरा गई।
उसी समय बाहर से हल्की सी आवाज आई।
“पूजा…”
पूजा ने खिड़की से बाहर देखा।
अर्जुन हवेली की दीवार के पास खड़ा था।
बारिश में पूरा भीगा हुआ…
पूजा की आँखों में आँसू आ गए।
“अर्जुन…”
अर्जुन धीरे से बोला—
“चलो… अभी इसी वक्त यहाँ से निकलते हैं…”
पूजा कुछ सेकंड चुप रही…
फिर उसने हिम्मत करके हाँ कर दी।
दोनों चुपके से हवेली के पीछे वाले रास्ते से भागने लगे।
चारों तरफ अंधेरा था।
बारिश लगातार तेज होती जा रही थी।
दोनों गाँव के बाहर सड़क तक पहुँच ही रहे थे…
तभी पीछे से घोड़ों और लोगों की आवाजें आने लगीं।
हरिराम को सब पता चल चुका था।
वो कई लोगों को लेकर उनके पीछे आ रहा था।
हरिराम गुस्से में चिल्लाया—
“भागकर कहाँ जाओगे?!”
पूजा डर गई।
अर्जुन ने उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।
“डरो मत… मैं हूँ ना…”
दोनों खेतों की तरफ भागने लगे।
पीछे से लोग मशाल लेकर उनका पीछा कर रहे थे।
तभी अचानक पूजा का पैर कीचड़ में फिसल गया।
वो जमीन पर गिर पड़ी।
अर्जुन उसे उठाने लगा…
लेकिन तब तक हरिराम और उसके आदमी वहाँ पहुँच चुके थे।
हरिराम गुस्से में अर्जुन के सामने आकर खड़ा हो गया।
उसके हाथ में बंदूक थी…
पूजा डर के मारे चीख पड़ी…
और अर्जुन समझ गया…
कि अब कुछ बहुत बुरा होने वाला है बारिश लगातार तेज हो रही थी।
चारों तरफ अंधेरा था।
हरिराम बंदूक लेकर अर्जुन के सामने खड़ा था।
उसकी आँखों में सिर्फ गुस्सा था।
पूजा रोते हुए हरिराम के पैरों में गिर गई।
“प्लीज़ इन्हें छोड़ दीजिए!”
लेकिन हरिराम का दिल पत्थर बन चुका था।
वो गुस्से में चिल्लाया—
“जिस आदमी ने मेरी इज्जत छीनने की कोशिश की… वो जिंदा नहीं बचेगा!”
अर्जुन पूजा के सामने आकर खड़ा हो गया।
“पूजा… पीछे हट जाओ…”
पूजा लगातार रो रही थी।
“नहीं! मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगी!”
तभी हरिराम ने बंदूक अर्जुन की तरफ तान दी।
कुछ सेकंड के लिए सब शांत हो गया।
सिर्फ बारिश की आवाज आ रही थी।
फिर अचानक…
धायँ!!!
गोली चल गई।
पूजा जोर से चीखी।
अर्जुन जमीन पर गिर चुका था।
उसके सीने से खून बह रहा था।
पूजा पागलों की तरह उसके पास बैठ गई।
“अर्जुन… आँखें खोलो!”
अर्जुन दर्द में हल्का सा मुस्कुराया।
उसने काँपते हाथ से पूजा का चेहरा छुआ।
“रो मत…”
पूजा फूट-फूटकर रोने लगी।
“मुझे छोड़कर मत जाओ…”
अर्जुन धीरे से बोला—
“अगर अगले जन्म में मिला… तो सिर्फ तुम्हारा बनकर आऊँगा…”
इतना कहकर उसका हाथ धीरे-धीरे नीचे गिर गया।
अर्जुन मर चुका था…
पूजा की दुनिया उसी पल खत्म हो गई।
वो जोर-जोर से रोने लगी।
उधर हरिराम भी घबरा गया था।
उसे शायद पहली बार एहसास हुआ कि गुस्से में उसने क्या कर दिया।
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी।
कुछ दिनों बाद पूरे गाँव में ये खबर फैल गई।
लोग हरिराम से नफरत करने लगे।
और पूजा…
वो पूरी तरह खामोश हो चुकी थी।
ना किसी से बात करती…
ना कहीं जाती…
बस हर रात अर्जुन की पुरानी तस्वीर लेकर रोती रहती।
एक दिन अचानक पूजा हवेली से गायब हो गई।
किसी को नहीं पता चला वो कहाँ गई।
लेकिन गाँव वाले आज भी कहते हैं…
बरसात की रातों में गाँव के बाहर वाली सड़क पर एक लड़की सफेद कपड़ों में दिखाई देती है…
जिसकी आँखों में आँसू होते हैं…
और वो किसी “अर्जुन” को पुकारती रहती है कई साल बीत चुके थे…
हरिराम अब पहले जैसा ताकतवर आदमी नहीं रहा था।
उसके सफेद बाल और बढ़ चुके थे।
चेहरा बूढ़ा और डरावना लगने लगा था।
लेकिन एक चीज आज भी उसका पीछा नहीं छोड़ रही थी…
अर्जुन की मौत।
हर रात उसे वही मंजर दिखाई देता—
बारिश…
गोली की आवाज…
और अर्जुन का खून से भरा चेहरा…
हरिराम डरकर नींद से उठ जाता।
धीरे-धीरे हवेली भी वीरान होने लगी।
नौकर एक-एक करके काम छोड़कर चले गए।
लोग कहते थे—
“उस हवेली में अब शांति नहीं बची…”
उधर पूजा का आज तक कोई पता नहीं चला था।
कोई कहता वो शहर चली गई…
कोई कहता उसने नदी में कूदकर जान दे दी…
लेकिन सच कोई नहीं जानता था।
एक रात बहुत तेज तूफान आया।
बिजली बार-बार चमक रही थी।
हरिराम अपनी हवेली में अकेला बैठा था।
तभी अचानक उसे पायल की आवाज सुनाई दी।
छन… छन… छन…
हरिराम डर गया।
उसने इधर-उधर देखा।
पूरा कमरा खाली था।
फिर अचानक हवेली का मुख्य दरवाजा अपने आप खुल गया।
ठंडी हवा अंदर आने लगी।
हरिराम के हाथ काँपने लगे।
तभी उसने सीढ़ियों पर एक लड़की को खड़ा देखा…
सफेद कपड़े…
खुले बाल…
और आँसुओं से भरी आँखें…
हरिराम की साँसें रुक गईं।
“प… पूजा…?!”
लड़की धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।
हरिराम डरकर पीछे हटने लगा।
“तू… तू जिंदा है…?”
पूजा की आवाज बहुत धीमी थी—
“जिस दिन अर्जुन मरा था… उसी दिन मैं भी मर गई थी…”
इतना सुनते ही हरिराम पूरी तरह डर गया।
उसने काँपती आवाज में कहा—
“मुझे माफ कर दो…”
पूजा की आँखों से आँसू निकल पड़े।
“तुमने सिर्फ अर्जुन को नहीं मारा…”
“तुमने मेरी पूरी जिंदगी खत्म कर दी…”
अचानक पूरे हवेली में तेज हवा चलने लगी।
दरवाजे अपने आप बंद होने लगे।
हरिराम चीखने लगा—
“मुझे छोड़ दो!”
लेकिन पूजा बस उसे घूरती रही।
तभी अचानक बिजली चमकी…
और अगले ही पल…
पूजा गायब हो चुकी थी।
हरिराम डर के मारे जमीन पर गिर पड़ा।
अगली सुबह गाँव वाले हवेली पहुँचे।
हरिराम जमीन पर पड़ा था…
डर से उसकी मौत हो चुकी थी।
उस दिन के बाद वो हवेली हमेशा के लिए बंद हो गई।
लोग कहते हैं…
आज भी बरसात की रातों में उस हवेली से पायल की आवाज आती है…
और सफेद कपड़ों में एक लड़की हवेली की छत पर खड़ी दिखाई देती है…
जो आज भी अपने अधूरे प्यार का इंतजार कर रही है हरिराम की मौत के बाद पूरी हवेली सुनसान हो गई थी।
अब वहाँ कोई नहीं रहता था।
गाँव वाले शाम होते ही उस रास्ते से गुजरना बंद कर देते।
लोग कहते थे—
“उस हवेली में पूजा की आत्मा भटकती है…”
कई लोगों ने रात में हवेली की छत पर सफेद कपड़ों में एक लड़की को खड़े देखा था।
धीरे-धीरे हवेली डर की कहानी बन चुकी थी।
इसी गाँव में रवि नाम का एक लड़का रहता था।
उम्र लगभग 22 साल।
उसे भूत-प्रेत जैसी बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था।
एक दिन उसके दोस्तों ने कहा—
“अगर इतना ही बहादुर है… तो एक रात उस हवेली में बिताकर दिखा।”
रवि हँस पड़ा।
“ये सब लोगों का वहम है।”
उसी रात रवि टॉर्च लेकर हवेली पहुँच गया।
चारों तरफ अंधेरा था।
पुरानी टूटी खिड़कियाँ हवा में हिल रही थीं।
हवेली को देखकर ही डर लग रहा था…
लेकिन रवि अंदर चला गया।
जैसे ही उसने दरवाजा खोला…
पुरानी लकड़ियों की जोरदार आवाज गूँज उठी।
पूरा घर धूल से भरा हुआ था।
दीवारों पर जाले लगे थे।
रवि धीरे-धीरे अंदर बढ़ने लगा।
तभी अचानक ऊपर से पायल की आवाज आई—
छन… छन… छन…
रवि रुक गया।
उसका दिल तेज धड़कने लगा।
उसने खुद को समझाया—
“शायद हवा होगी…”
लेकिन तभी फिर वही आवाज आई…
इस बार और पास से…
रवि डरते हुए सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।
जैसे ही वो ऊपर पहुँचा…
उसे एक कमरा खुला दिखाई दिया।
कमरे के अंदर हल्की मोमबत्ती जल रही थी…
जबकि हवेली में कोई था ही नहीं।
रवि धीरे-धीरे कमरे के अंदर गया।
तभी उसकी नजर दीवार पर लगी एक पुरानी तस्वीर पर पड़ी।
तस्वीर में पूजा और अर्जुन साथ खड़े मुस्कुरा रहे थे।
रवि हैरान रह गया।
उसी समय पीछे से एक लड़की की धीमी आवाज आई—
“तुम यहाँ क्यों आए हो…?”
रवि का पूरा शरीर काँप गया।
उसने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा…
और उसकी चीख निकल गई…
सामने सफेद कपड़ों में वही लड़की खड़ी थी…
पूजा…
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे…
और पैर जमीन से थोड़े ऊपर थे रवि डर के मारे पीछे हटने लगा।
उसके हाथ से टॉर्च गिर गई।
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
सिर्फ मोमबत्ती की हल्की रोशनी में पूजा का चेहरा दिखाई दे रहा था।
सफेद कपड़े…
खुले बाल…
और आँखों में गहरा दर्द…
रवि काँपती आवाज में बोला—
“तु… तुम कौन हो…?”
लड़की धीरे से बोली—
“लोग मुझे पूजा कहते थे…”
रवि की साँसें अटक गईं।
उसे गाँव वालों की सारी बातें याद आने लगीं।
वो भागना चाहता था…
लेकिन उसके पैर जैसे जम चुके थे।
पूजा धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।
उसकी पायल की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।
छन… छन… छन…
रवि डरकर बोला—
“मुझे जाने दो… मैंने कुछ नहीं किया…”
पूजा रुक गई।
फिर उसने दर्द भरी आवाज में कहा—
“मैं भी कभी जीना चाहती थी…”
“मैं भी खुश रहना चाहती थी…”
उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे।
अचानक कमरे की खिड़कियाँ अपने आप खुलने लगीं।
तेज हवा अंदर आने लगी।
मोमबत्ती बार-बार बुझने लगी।
पूजा ने दीवार पर लगी अर्जुन की तस्वीर की तरफ देखा।
“उन्होंने उसे मुझसे छीन लिया…”
रवि अब समझ चुका था…
कि ये आत्मा किसी को डराना नहीं चाहती…
वो बस अपने अधूरे प्यार के दर्द में फँसी हुई थी।
रवि ने हिम्मत करके पूछा—
“तुम्हें शांति कैसे मिलेगी…?”
पूजा कुछ सेकंड चुप रही।
फिर धीरे से बोली—
“अर्जुन की आखिरी निशानी… अभी भी इसी हवेली में छिपी है…”
रवि हैरान हो गया।
“क्या?”
पूजा ने काँपते हाथ से कमरे के पुराने संदूक की तरफ इशारा किया।
“उस संदूक में अर्जुन की डायरी है…”
“जब तक वो दुनिया के सामने नहीं आएगी… मेरी आत्मा यहीं कैद रहेगी…”
इतना सुनते ही अचानक नीचे से किसी के चलने की आवाज आने लगी।
ठक… ठक… ठक…
रवि घबरा गया।
“क… कोई नीचे है…”
पूजा की आँखें अचानक डर से फैल गईं।
वो धीरे से बोली—
“वो फिर आ गया…”
रवि कुछ समझ पाता उससे पहले…
सीढ़ियों पर किसी बूढ़े आदमी की परछाई दिखाई देने लगी…
और धीरे-धीरे वो ऊपर आने लगा सीढ़ियों से आने वाली आवाज लगातार पास आ रही थी।
ठक… ठक… ठक…
रवि का पूरा शरीर काँप रहा था।
उसने डरते हुए नीचे देखा…
और उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
सीढ़ियों पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा था।
सफेद धोती…
झुका हुआ शरीर…
और डरावनी लाल आँखें…
रवि ने उसे तुरंत पहचान लिया।
“ह… हरिराम…?!”
बूढ़ा आदमी धीरे-धीरे मुस्कुराने लगा।
उसकी मुस्कान इंसानों जैसी नहीं थी।
पूजा डरकर पीछे हट गई।
उसकी आँखों में पहली बार डर साफ दिखाई दे रहा था।
हरिराम की भारी आवाज पूरे हवेली में गूँजी—
“तुझे लगा… मौत के बाद भी मैं तुझे छोड़ दूँगा…?”
रवि समझ गया…
हरिराम की आत्मा भी इसी हवेली में भटक रही थी।
और शायद उसी ने पूजा को यहाँ कैद कर रखा था।
अचानक पूरे कमरे का माहौल बदल गया।
दीवारों पर लगी चीजें अपने आप हिलने लगीं।
खिड़कियाँ जोर-जोर से बंद होने लगीं।
रवि डरकर चिल्लाया—
“ये सब क्या हो रहा है?!”
पूजा रोते हुए बोली—
“वो मुझे कभी आजाद नहीं होने देगा…”
हरिराम धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ने लगा।
“पूजा सिर्फ मेरी थी… और हमेशा मेरी रहेगी…”
उसकी आवाज सुनकर रवि का खून जम गया।
तभी अचानक संदूक अपने आप खुल गया।
उसके अंदर एक पुरानी डायरी रखी थी।
पूजा तुरंत बोली—
“रवि! जल्दी डायरी उठाओ!”
रवि काँपते हुए आगे बढ़ा।
लेकिन जैसे ही उसने डायरी उठाई…
हरिराम जोर से चीखा—
“हिम्मत मत करना!!!”
अचानक पूरा कमरा हिलने लगा।
छत से मिट्टी गिरने लगी।
रवि डर गया…
लेकिन उसने डायरी कसकर पकड़ ली।
तभी डायरी से एक पुराना फोटो नीचे गिरा।
उस फोटो में अर्जुन और पूजा मंदिर में खड़े थे…
और पीछे लिखा था—
“अगर हमें कुछ हो जाए… तो हमारी कहानी दुनिया तक जरूर पहुँचाना…”
रवि की आँखें भर आईं।
उसे समझ आ गया…
ये सिर्फ प्यार की कहानी नहीं थी…
ये दो टूटे हुए लोगों की अधूरी जिंदगी थी।
तभी हरिराम गुस्से में रवि की तरफ दौड़ा।
उसकी आँखें आग की तरह जल रही थीं।
पूजा जोर से चीखी—
“भागो रवि!!!”
और अगले ही पल…
पूरे हवेली की लाइटें एक साथ बुझ गईं पूरा हवेली अंधेरे में डूब चुकी थी।
चारों तरफ सिर्फ तूफान की आवाज गूँज रही थी।
रवि जान बचाकर सीढ़ियों से नीचे भाग रहा था।
उसके हाथ में अर्जुन की डायरी थी।
पीछे से हरिराम की डरावनी आवाज लगातार सुनाई दे रही थी—
“डायरी मुझे दे दो!!!”
रवि डर के मारे काँप रहा था…
लेकिन वो भागता रहा।
जैसे ही वो हवेली के मुख्य दरवाजे तक पहुँचा…
दरवाजा अपने आप बंद हो गया।
धड़ाम!!!
रवि घबरा गया।
तभी अचानक उसके सामने हरिराम की आत्मा दिखाई दी।
उसकी आँखें लाल आग की तरह जल रही थीं।
चेहरा पूरी तरह डरावना हो चुका था।
वो गुस्से में बोला—
“कोई भी इस हवेली से सच बाहर नहीं ले जा सकता!”
रवि पीछे हटने लगा।
तभी ऊपर से पूजा की आवाज गूँजी—
“रवि! डायरी पढ़ो!”
रवि ने काँपते हाथों से डायरी खोली।
उसमें अर्जुन ने अपनी आखिरी बातें लिखी थीं—
“अगर ये डायरी किसी को मिले…”
“तो दुनिया को बता देना कि पूजा बेवफा नहीं थी…”
“वो सिर्फ मजबूर थी…”
“हम बस साथ जीना चाहते थे…”
ये पढ़ते ही हवेली के अंदर तेज रोशनी फैलने लगी।
हरिराम जोर-जोर से चीखने लगा।
“नहीं!!!”
पूजा धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरी।
आज उसके चेहरे पर डर नहीं था…
सिर्फ शांति थी।
वो रवि के पास आकर खड़ी हो गई।
फिर उसने हरिराम की तरफ देखकर कहा—
“अब सच दुनिया के सामने आ चुका है…”
अचानक हवेली की दीवारें काँपने लगीं।
हरिराम की आत्मा धीरे-धीरे धुएँ में बदलने लगी।
वो चीखता रहा…
लेकिन कुछ सेकंड बाद पूरी तरह गायब हो गया।
पूरा हवेली शांत हो चुका था।
बारिश भी रुक गई।
पहली बार हवेली में सुकून महसूस हो रहा था।
पूजा की आँखों से आँसू निकल पड़े।
उसने रवि की तरफ मुस्कुराकर देखा।
“धन्यवाद…”
रवि धीरे से बोला—
“अब तुम आजाद हो…”
पूजा ने आसमान की तरफ देखा।
तभी अचानक हवेली के बाहर हल्की रोशनी दिखाई दी।
उस रोशनी में अर्जुन खड़ा था…
मुस्कुराते हुए…
पूजा की आँखें भर आईं।
वो धीरे-धीरे अर्जुन की तरफ बढ़ने लगी।
जाने से पहले उसने आखिरी बार रवि की तरफ देखा।
फिर मुस्कुराकर बोली—
“सच्चा प्यार कभी खत्म नहीं होता…”
और अगले ही पल…
पूजा और अर्जुन दोनों रोशनी में गायब हो गए।
उस दिन के बाद हवेली फिर कभी डरावनी नहीं लगी।
लोग कहते हैं…
अब वहाँ रात में डर नहीं…
बल्कि अजीब सी शांति महसूस होती है…
जैसे दो अधूरी मोहब्बतों को आखिरकार अपना घर मिल गया हो पूजा और अर्जुन की आत्मा के जाने के बाद पूरा गाँव बदल गया था।
अब लोग उस हवेली से डरते नहीं थे।
धीरे-धीरे गाँव वाले फिर उस रास्ते से आने-जाने लगे।
रवि ने भी सबको अर्जुन की डायरी के बारे में बता दिया।
पूरा गाँव सच जानकर हैरान रह गया।
लोगों को पहली बार एहसास हुआ…
कि पूजा कभी गलत नहीं थी…
वो बस मजबूर थी।
कुछ महीनों बाद हवेली की सफाई शुरू हुई।
पुरानी टूटी चीजें हटाई जाने लगीं।
गाँव के प्रधान ने फैसला किया—
“इस हवेली को स्कूल बनाया जाएगा…”
सब लोग खुश थे।
लेकिन हवेली के अंदर काम करने वाले मजदूर अक्सर एक अजीब बात कहते थे।
उन्हें कभी-कभी ऊपर वाले कमरे से पायल की हल्की आवाज सुनाई देती…
छन… छन…
लेकिन अब उस आवाज में डर नहीं था।
जैसे कोई बस चुपचाप वहाँ घूम रहा हो।
एक रात रवि अकेला हवेली देखने गया।
अब हवेली पहले से काफी साफ हो चुकी थी।
वो धीरे-धीरे उसी पुराने कमरे तक पहुँचा…
जहाँ उसने पहली बार पूजा को देखा था।
कमरा अब खाली था।
ना मोमबत्ती…
ना कोई परछाई…
रवि हल्का सा मुस्कुराया।
“शायद अब सब खत्म हो चुका है…”
तभी अचानक पीछे से एक छोटी बच्ची की आवाज आई—
“भैया…”
रवि चौंक गया।
उसने पीछे मुड़कर देखा।
करीब 10 साल की एक छोटी लड़की सफेद कपड़ों में खड़ी थी।
उसके हाथ में पुरानी गुड़िया थी।
रवि ने हैरानी से पूछा—
“तुम यहाँ क्या कर रही हो?”
लड़की धीरे से मुस्कुराई।
“मैं अपनी माँ को ढूँढ रही हूँ…”
रवि को कुछ अजीब महसूस हुआ।
उसने पूछा—
“तुम्हारी माँ कौन है?”
लड़की ने धीरे-धीरे ऊपर कमरे की दीवार की तरफ उंगली उठाई…
रवि ने वहाँ देखा…
और उसके होश उड़ गए…
दीवार पर धूल के बीच अपने आप एक नाम लिखा दिखाई दे रहा था—
“पूजा…”
रवि डरकर पीछे हट गया।
तभी अचानक हवेली की सारी खिड़कियाँ अपने आप बंद होने लगीं।
धड़ाम!
धड़ाम!
धड़ाम!
छोटी लड़की जोर-जोर से हँसने लगी।
लेकिन उसकी हँसी अब बिल्कुल इंसानों जैसी नहीं थी…
धीरे-धीरे उसकी आँखें पूरी काली होने लगीं…
और वो बोली—
“माँ अभी गई नहीं है…”
रवि का दिल डर से जम गया…
और उसी समय हवेली की ऊपर वाली मंजिल से फिर वही पायल की आवाज आने लगी—
छन… छन… छन रवि का पूरा शरीर डर से काँप रहा था।
उसने कभी नहीं सोचा था कि पूजा और अर्जुन की आत्मा को शांति मिलने के बाद भी हवेली में कुछ बाकी हो सकता है।
छोटी लड़की अभी भी उसके सामने खड़ी हँस रही थी।
लेकिन अब उसकी हँसी बिल्कुल इंसानों जैसी नहीं लग रही थी…
उसकी आँखें पूरी काली हो चुकी थीं।
चेहरे पर अजीब सी मुस्कान फैल गई थी।
हवा अचानक बहुत ठंडी हो गई।
रवि धीरे-धीरे पीछे हटने लगा।
“त… तुम कौन हो…?”
लड़की ने सिर टेढ़ा करके उसकी तरफ देखा।
फिर धीमी आवाज में बोली—
“माँ मुझे छोड़कर नहीं जा सकती…”
इतना सुनते ही ऊपर वाली मंजिल से जोरदार चीज गिरने की आवाज आई।
धड़ाम!!!
पूरा हवेली काँप उठा।
रवि डर गया।
तभी हवेली की सारी लाइटें एक साथ जलने-बुझने लगीं।
टक… टक… टक…
छत से मिट्टी गिरने लगी।
लड़की अचानक गायब हो गई।
रवि घबरा गया।
“क… कहाँ गई?!”
तभी पीछे से पायल की आवाज आई—
छन… छन… छन…
रवि ने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा…
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
अब हवेली का माहौल पहले से भी ज्यादा डरावना हो चुका था।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई अदृश्य चीज हर तरफ घूम रही हो।
अचानक ऊपर से किसी औरत के रोने की आवाज आने लगी।
बहुत दर्द भरी आवाज…
जैसे कोई सालों से रो रहा हो।
रवि हिम्मत करके सीढ़ियों की तरफ बढ़ा।
हर कदम के साथ उसका डर बढ़ता जा रहा था।
सीढ़ियाँ अपने आप चर्र… चर्र… की आवाज कर रही थीं।
जैसे हवेली उसे ऊपर जाने से रोकना चाहती हो।
जैसे ही वो ऊपर पहुँचा…
उसे वही पुराना कमरा खुला दिखाई दिया।
लेकिन इस बार कमरे का नजारा अलग था।
कमरे में दर्जनों पुरानी तस्वीरें बिखरी हुई थीं।
कुछ तस्वीरों में पूजा थी…
कुछ में अर्जुन…
लेकिन एक तस्वीर देखकर रवि के हाथ काँपने लगे।
उस तस्वीर में हरिराम एक छोटी बच्ची के साथ खड़ा था…
वही छोटी लड़की…
जो अभी नीचे थी…
रवि हैरान रह गया।
“ये… कैसे हो सकता है…?”
तस्वीर के पीछे कुछ लिखा था।
रवि ने काँपते हाथों से उसे पलटा।
उस पर लिखा था—
“गुड़िया — हरिराम की बेटी”
रवि के पैरों तले जमीन खिसक गई।
“हरिराम की… बेटी?!”
तभी अचानक कमरे का दरवाजा अपने आप बंद हो गया।
धड़ाम!!!
रवि चीख पड़ा।
उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की…
लेकिन दरवाजा नहीं खुला।
तभी कमरे के कोने में रखी पुरानी अलमारी अपने आप खुलने लगी।
किररररर…
अंदर पूरी अंधेरी जगह थी।
लेकिन धीरे-धीरे उस अंधेरे में दो चमकती हुई आँखें दिखाई देने लगीं…
रवि डर के मारे पीछे हट गया।
और तभी उसी अंधेरे से छोटी लड़की बाहर निकली।
लेकिन अब उसका चेहरा पूरी तरह बदल चुका था।
उसके चेहरे पर काले निशान थे…
मुँह असामान्य तरीके से खुला हुआ था…
और हाथ में वही पुरानी गुड़िया थी।
लड़की धीमी आवाज में बोली—
“माँ ने मुझे अकेला छोड़ दिया…”
फिर अचानक उसकी आवाज बदल गई…
अब वो एक बूढ़ी औरत जैसी भारी आवाज में बोल रही थी—
“अब कोई भी इस हवेली से बाहर नहीं जाएगा…”
अचानक कमरे की सारी तस्वीरें हवा में उड़ने लगीं।
काँच अपने आप टूटने लगे।
रवि डरकर जमीन पर गिर पड़ा।
उसे लगने लगा कि आज वो जिंदा नहीं बचेगा।
तभी अचानक उसके जेब में रखी अर्जुन की पुरानी डायरी अपने आप चमकने लगी।
डायरी के पन्ने तेजी से पलटने लगे।
और एक पन्ने पर लाल रंग से अपने आप शब्द उभरने लगे—
“हवेली का असली श्राप… अभी खत्म नहीं हुआ…”
रवि की साँसें रुक गईं।
उसने काँपते हुए आगे पढ़ा—
“हरिराम ने सिर्फ पूजा और अर्जुन की जिंदगी बर्बाद नहीं की थी…”
“उसने अपनी ही बेटी को भी इस हवेली में मार डाला था…”
इतना पढ़ते ही पूरी हवेली में जोरदार चीख गूँज उठी।
छोटी लड़की जोर-जोर से रोने लगी।
“मुझे अंधेरे से डर लगता है…”
उसकी चीख सुनकर रवि के कान सुन्न हो गए।
तभी अचानक कमरे की दीवारों से खून बहने लगा।
धीरे-धीरे पूरा कमरा लाल होने लगा।
रवि डरकर भगवान का नाम लेने लगा।
लेकिन डर अभी खत्म नहीं हुआ था…
क्योंकि तभी हवेली की छत से किसी भारी चीज के घिसटने की आवाज आने लगी…
घ्ररररर…
घ्ररररर…
जैसे कोई बहुत बड़ा और खतरनाक जीव ऊपर चल रहा हो…
और फिर…
छत पर दो विशाल लाल आँखें चमकने लगीं…
जो सीधे रवि को घूर रही थीं कमरे की छत पर चमकती हुई उन दो लाल आँखों को देखकर रवि का खून जम गया।
उसकी साँसें तेज चलने लगीं।
पूरा कमरा अंधेरे और खून जैसी बदबू से भर चुका था।
ऊपर से लगातार घिसटने की आवाज आ रही थी—
घ्ररररर…
घ्ररररर…
ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत भारी चीज छत के ऊपर रेंग रही हो।
छोटी लड़की कमरे के बीचों-बीच खड़ी रो रही थी।
उसके आँसू अब लाल रंग के हो चुके थे।
वो बार-बार एक ही बात बोल रही थी—
“पापा ने उसे जगा दिया…”
“पापा ने उसे जगा दिया…”
रवि डरते हुए बोला—
“क… किसे जगा दिया?”
लड़की ने धीरे-धीरे अपना सिर ऊपर उठाया।
उसकी पूरी काली आँखें सीधे छत की तरफ थीं।
फिर उसने काँपती आवाज में कहा—
“तहखाने वाले शैतान को…”
इतना सुनते ही अचानक पूरी हवेली जोर से हिलने लगी।
धड़ाम!!!
दीवारों से मिट्टी गिरने लगी।
रवि डरकर जमीन पकड़कर बैठ गया।
तभी कमरे के बीचों-बीच फर्श अपने आप टूटने लगा।
चर्रररर…
लकड़ियाँ टूटकर नीचे गिर गईं।
नीचे गहरा अंधेरा दिखाई देने लगा।
ऐसा अंधेरा जिसमें कुछ भी नजर नहीं आ रहा था।
लेकिन उस अंधेरे से बहुत ठंडी हवा ऊपर आ रही थी…
और साथ में किसी के धीरे-धीरे साँस लेने की आवाज—
ह्ह्ह्ह्ह…
ह्ह्ह्ह्ह…
रवि का पूरा शरीर काँप उठा।
तभी अर्जुन की डायरी फिर चमकने लगी।
उसके पन्ने तेजी से पलटने लगे।
एक नया पन्ना खुला।
उस पर अपने आप शब्द उभरने लगे—
“हरिराम ने अपनी दौलत बचाने के लिए काला तंत्र किया था…”
“उसने हवेली के नीचे एक शैतानी आत्मा को बाँध रखा था…”
रवि की आँखें फटी की फटी रह गईं।
वो काँपती आवाज में बोला—
“ये… क्या है…?”
छोटी लड़की रोते हुए बोली—
“वो लोगों की आत्माएँ खाता है…”
“पापा उसे रोज जानवरों की बलि देते थे…”
“लेकिन एक रात…”
वो अचानक चुप हो गई।
रवि चीखा—
“फिर क्या हुआ?!”
लड़की की आँखों से आँसू गिरने लगे।
“एक रात उसने मुझे देख लिया…”
रवि की साँस रुक गई।
“उस दिन पापा ने मुझे बचाने की कोशिश भी नहीं की…”
इतना बोलते ही लड़की जोर-जोर से रोने लगी।
अचानक पूरे कमरे की लाइटें बुझ गईं।
अब सिर्फ नीचे तहखाने से लाल रोशनी आ रही थी।
और तभी…
उस अंधेरे के अंदर कुछ हिलने लगा…
धीरे-धीरे…
बहुत धीरे…
जैसे कोई विशाल चीज जाग रही हो।
रवि डरकर पीछे हटने लगा।
तभी अचानक नीचे से एक लंबा काला हाथ बाहर निकला।
उसके नाखून इंसानों जैसे नहीं थे।
बहुत लंबे… बहुत नुकीले…
हाथ धीरे-धीरे फर्श पकड़कर ऊपर आने लगा।
चरररर…
रवि की चीख निकल गई।
तभी हवेली के हर कमरे से औरतों और बच्चों की रोने की आवाजें आने लगीं।
जैसे सैकड़ों आत्माएँ एक साथ रो रही हों।
छोटी लड़की जोर से चिल्लाई—
“भागो!!!”
लेकिन तभी रवि का पैर टूटे हुए फर्श में फँस गया।
वो गिर पड़ा।
उसके हाथ से डायरी दूर जा गिरी।
तभी नीचे से दूसरा काला हाथ निकला…
और उसने रवि का पैर पकड़ लिया।
उसका हाथ बर्फ से भी ज्यादा ठंडा था।
रवि दर्द से चीख पड़ा।
वो पूरी ताकत से खुद को छुड़ाने लगा।
लेकिन वो चीज बहुत ताकतवर थी।
धीरे-धीरे रवि को नीचे अंधेरे में खींचा जाने लगा।
रवि रोते हुए चिल्लाया—
“बचाओ!!!”
तभी अचानक पूरी हवेली में पूजा की आवाज गूँज उठी—
“उसे छोड़ दो!!!”
अचानक तेज सफेद रोशनी कमरे में फैल गई।
और उसी रोशनी के बीच पूजा दिखाई दी।
लेकिन इस बार उसका रूप पहले जैसा शांत नहीं था।
उसकी आँखें चमक रही थीं।
बाल हवा में उड़ रहे थे।
वो गुस्से में उस काले हाथ की तरफ बढ़ी।
और जोर से बोली—
“ये हवेली अब तेरी नहीं है!”
इतना सुनते ही पूरा कमरा काँपने लगा।
तहखाने से डरावनी चीख निकली।
लेकिन तभी…
नीचे अंधेरे में दो नहीं…
बल्कि दर्जनों लाल आँखें एक साथ खुल गईं…
रवि डर से पत्थर बन गया…
क्योंकि अब उसे समझ आ चुका था…
तहखाने में सिर्फ एक शैतान नहीं था…
वहाँ कुछ और भी था…
कुछ ऐसा…
जो सालों से अंधेरे में बंद था…
और अब बाहर आने वाला था
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