इंसानी दुल्हन और जिन्न शहज़ादा

 

















उत्तर प्रदेश के एक पुराने गाँव “चाँदपुरा” में लोग सूरज ढलने के बाद जल्दी अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे। गाँव के चारों तरफ घने आम के बाग, पुराने खंडहर और सुनसान खेत फैले हुए थे। लेकिन सबसे डरावनी जगह थी — गाँव के बाहर बना एक पुराना सूखा कुआँ।


उस कुएँ के बारे में गाँव में अजीब कहानियाँ मशहूर थीं।


लोग कहते थे कि वहाँ जिन्न रहते हैं।


गाँव के बूढ़े अक्सर बच्चों को डराते हुए कहते,


“मग़रिब के बाद उस कुएँ के पास मत जाना… वरना जिन्न अपने साथ ले जाएगा…”


ज्यादातर लोग इन बातों को सच मानते थे। इसलिए शाम होते ही उस रास्ते पर कोई दिखाई नहीं देता था।


उसी गाँव में एक लड़की रहती थी — “सना।”


सना करीब 19 साल की थी। बहुत खूबसूरत, मासूम और शर्मीली लड़की। बड़ी-बड़ी आँखें, लंबे काले बाल और चेहरे पर अजीब सी मासूमियत। वह पाँच वक्त की नमाज़ पढ़ती थी और अपने अब्बू-अम्मी की बहुत इज्ज़त करती थी।


उसके अब्बू “यूसुफ चाचा” गाँव के गरीब आदमी थे। मिट्टी के छोटे से घर में बड़ी मुश्किल से गुज़ारा चलता था। घर की दीवारों पर जगह-जगह दरारें थीं। बरसात में छत टपकती थी। लेकिन गरीबी के बावजूद उनके घर में मोहब्बत और सुकून था।


हर रात खाना खाने के बाद सना अपनी अम्मी के साथ आँगन में बैठकर आसमान देखा करती थी।


एक रात उसकी अम्मी ने मुस्कुराकर पूछा,


“सना… कैसी शादी चाहती हो तुम?”


सना शर्माकर नीचे देखने लगी।


“अम्मी…”


उसकी अम्मी हँस पड़ीं।


“अरे बता भी दो…”


सना ने धीरे से कहा,


“बस… ऐसा शौहर जो मुझे समझे… मेरी इज्ज़त करे… और अल्लाह से डरता हो…”


उसकी अम्मी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेर दिया।


लेकिन उन्हें क्या पता था कि सना की किस्मत में कुछ और ही लिखा है…


उस रात गाँव में अचानक मौसम बदल गया।


तेज आँधी चलने लगी।


आसमान पर काले बादल छा गए।


बिजली बार-बार चमक रही थी।


यूसुफ चाचा अभी तक घर नहीं लौटे थे।


सना की अम्मी परेशान होकर बोलीं,


“जरा बाहर जाकर देखो तुम्हारे अब्बू कहाँ रह गए…”


सना ने जल्दी से अपना दुपट्टा लिया और बाहर निकल गई।


गाँव की गलियाँ पूरी तरह सुनसान थीं।


हवा इतनी तेज थी कि पेड़ जोर-जोर से हिल रहे थे।


कहीं-कहीं मिट्टी उड़कर हवा में घूम रही थी।


सना जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाने लगी।


लेकिन तभी…


उसकी नजर गाँव के बाहर वाले पुराने सूखे कुएँ पर पड़ी।


और वहाँ कोई खड़ा था।


सफेद कपड़े…


बहुत लंबा कद…


और चमकती हुई अजीब आँखें…


सना का दिल जोर से धड़कने लगा।


उसे तुरंत गाँव वालों की बातें याद आ गईं।


“उस कुएँ में जिन्न रहते है

वह डरकर पीछे हटने लगी।


लेकिन तभी अचानक तेज हवा चली…


और उसका दुपट्टा उड़कर कुएँ के पास जा गिरा।


सना घबरा गई।


वह धीरे-धीरे दुपट्टा उठाने आगे बढ़ी।


तभी पीछे से भारी आवाज़ आई—


“रुको…”


सना जम गई।


उसकी साँसें रुकने लगीं।


उसने काँपते हुए पीछे देखा।


वही लंबा आदमी उसके पीछे खड़ा था।


अब उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था।


चेहरा इंसानों जैसा था… लेकिन आँखें बिल्कुल अलग थीं।


बहुत चमकीली…


बहुत डरावनी…


उसकी आवाज़ गहरी और अजीब थी।


“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था…”


सना काँपने लगी।


“म… मुझे जाने दो…”


लेकिन वह आदमी बस उसे देखता रहा।


अचानक बिजली चमकी।


और उसी रोशनी में सना ने देखा—


उस आदमी के पैर जमीन से थोड़े ऊपर थे…


उसकी चीख निकल गई।


“जिन्न…!!!”


वह भागने लगी।


लेकिन अचानक उसका पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गई।


जब उसने दोबारा ऊपर देखा…


तो वह आदमी उसके बिल्कुल सामने खड़ा था।


लेकिन उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था।


बल्कि अजीब सी उदासी थी।


उसने धीरे से कहा,


“डरो मत… मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगा…”


सना हैरान रह गई।


उसने पहली बार किसी जिन्न को इंसानों की तरह बात करते देखा था।


तेज हवा अब भी चल रही थी।


कुएँ के आसपास अंधेरा और गहरा हो चुका था।


सना रोते हुए बोली,

















“मुझे घर जाना है…”


कुछ पल तक वह जिन्न उसे देखता रहा।


फिर धीरे से बोला,


“तुम्हारा नाम… सना है ना?”


यह सुनते ही सना के चेहरे का रंग उड़ गया।


“त… तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?”


वह जिन्न हल्का सा मुस्कुराया।


“मैं तुम्हें बहुत पहले से देख रहा हूँ…”


सना का दिल डर से काँप उठा।


उसे महसूस हुआ जैसे कोई बहुत बड़ा राज उसके सामने आने वाला है।


तभी अचानक कुएँ के अंदर से अजीब सी फुसफुसाहटों की आवाज़ आने लगी।


हवा और ठंडी हो गई।


और अगले ही पल…


उस जिन्न ने सना की तरफ देखकर धीरे से कहा—


“तुम्हारी किस्मत अब इंसानों के साथ नहीं जुड़ी चाँदपुरा गाँव की वह रात धीरे-धीरे और ज्यादा डरावनी होती जा रही थी। आसमान पर काले बादल पूरी तरह छा चुके थे। तेज हवाएँ मिट्टी उड़ाती हुई सुनसान गलियों से गुजर रही थीं। दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ माहौल को और खौफनाक बना रही थी।


पुराने सूखे कुएँ के पास सना काँपती हुई खड़ी थी।


उसकी आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।


सामने वही अजीब आदमी खड़ा था…


या शायद आदमी नहीं…


जिन्न।


उसकी लंबी काली परछाईं बिजली चमकने के साथ जमीन पर फैल जाती थी। सफेद कपड़े हवा में लहरा रहे थे। लेकिन सबसे डरावनी थीं उसकी आँखें…


गहरी…


चमकती हुई…


और अजीब उदासी से भरी।


सना धीरे-धीरे पीछे हटने लगी।


उसकी आवाज काँप रही थी।


“मुझे जाने दो… अल्लाह के लिए मुझे जाने दो…”


लेकिन वह जिन्न शांत खड़ा रहा।


कुछ पल बाद उसने धीमी आवाज़ में कहा,


“अगर मैं तुम्हें नुकसान पहुँचाना चाहता… तो अब तक कर चुका होता।”


उसकी आवाज भारी जरूर थी, मगर उसमें गुस्सा नहीं था।


सना समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या करे।


उसका दिल बार-बार कह रहा था भाग जाओ…


लेकिन उसके पैर जैसे जम चुके थे।


तभी अचानक कुएँ के अंदर से अजीब आवाज़ आने लगी।


जैसे बहुत सारे लोग धीरे-धीरे फुसफुसा रहे हों।


सना डरकर रो पड़ी।


“ये… ये कैसी आवाज़ है?”


जिन्न ने तुरंत कुएँ की तरफ देखा।


उसका चेहरा अचानक सख्त हो गया।


“तुम्हें यहाँ नहीं रुकना चाहिए…”


“क… क्यों?”


जिन्न कुछ पल चुप रहा।


फिर धीरे से बोला,


“क्योंकि इस कुएँ में सिर्फ मैं नहीं रहता…”


यह सुनते ही सना का शरीर काँप उठा।


हवा अचानक और ठंडी हो गई।


पेड़ों की शाखाएँ जोर-जोर से हिलने लगीं।


तभी कुएँ के अंदर से किसी औरत के रोने जैसी आवाज़ आई।


सना डर के मारे पीछे हट गई।


“या अल्लाह…”


अचानक वह जिन्न तेजी से सना के सामने आ गया।


“भागो यहाँ से!”


उसकी आवाज पहली बार इतनी तेज थी।


सना घबरा गई।


लेकिन तभी कुएँ के अंदर से काला धुआँ निकलने लगा।


धीरे-धीरे वह धुआँ इंसानी शक्ल लेने लगा।


लंबे काले बाल…


पूरी काली आँखें…


और बहुत डरावना चेहरा…


सना चीख पड़ी।


वह डरकर गिर गई।


उसका पूरा शरीर काँप रहा था।


सामने खड़ा जिन्न तुरंत उसके आगे आ गया जैसे उसे बचा रहा हो।


काला साया डरावनी आवाज़ में बोला,


“ये लड़की इंसानों की दुनिया की है…”


सफेद कपड़ों वाला जिन्न गुस्से में बोला,


“इससे दूर रहो!”


सना कुछ समझ नहीं पा रही थी।


दोनों की आवाजें इंसानों जैसी नहीं थीं।


ऐसा लग रहा था जैसे हवा खुद बोल रही हो।


काला साया जोर से हँसा।


“तुम भूल रहे हो… तुम्हारे ऊपर क्या श्राप है…”


यह सुनते ही सफेद जिन्न का चेहरा बदल गया।


उसकी आँखों में दर्द दिखाई देने लगा।


सना डरते हुए सब देख रही थी।


तभी अचानक तेज बिजली चमकी।


और अगले ही पल…


सफेद जिन्न ने सना का हाथ पकड़ लिया।


उसका हाथ बर्फ जैसा ठंडा था।


“आँखें बंद करो!”


सना कुछ समझ पाती उससे पहले…


चारों तरफ तेज हवा घूमने लगी।


ऐसा लगा जैसे जमीन उसके नीचे से गायब हो रही हो।


सना डर के मारे चीख पड़ी।


फिर अचानक…


सब शांत हो गया।


जब उसने धीरे-धीरे आँखें खोलीं…


तो वह कुएँ के पास नहीं थी।


सना हैरान रह गई।


वह एक अजीब जगह पर खड़ी थी।


चारों तरफ बहुत बड़े-बड़े पेड़ थे जिनके पत्ते नीले रंग की हल्की रोशनी छोड़ रहे थे। जमीन पर धुंध फैली हुई थी। आसमान काला था लेकिन उसमें तारे बहुत चमक रहे थे।


यह दुनिया इंसानों की नहीं लग रही थी।


सना डरते हुए बोली,


“म… मैं कहाँ हूँ?”


सफेद जिन्न कुछ दूर खड़ा उसे देख रहा था।


अब उसका चेहरा पहले से ज्यादा साफ दिखाई दे रहा था।


वह बेहद खूबसूरत था… लेकिन उसकी आँखों में गहरा दर्द था।


उसने धीरे से जवाब दिया,


“जिन्नों की दुनिया में…”


यह सुनते ही सना की साँस अटक गई।


“न… नहीं… ये झूठ है…”


वह रोने लगी।


“मुझे मेरे घर जाना है… मेरी अम्मी परेशान होंगी…”


लेकिन जिन्न चुप रहा।


कुछ पल बाद वह बोला,


“तुम्हें यहाँ लाना मेरी मजबूरी थी।”


“कौन हो तुम…?”


जिन्न ने उसकी तरफ देखा।


“मेरा नाम ज़ायान है।”


“तुम मुझे यहाँ क्यों लाए?”


ज़ायान की आँखें नीचे झुक गईं।


“क्योंकि… तुम्हारी किस्मत अब हमारी दुनिया से जुड़ चुकी है।”


सना गुस्से और डर से काँपने लगी।


“मैं इंसान हूँ! मुझे तुम्हारी दुनिया से कोई मतलब नहीं!”


ज़ायान धीरे से बोला,


“काश ऐसा होता…”


सना की आँखों में आँसू भर आए।


“तुम लोग मुझसे क्या चाहते हो?”


कुछ पल तक खामोशी रही।


दूर कहीं अजीब परिंदों की आवाजें गूंज रही थीं।


फिर ज़ायान ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—


“तुम्हारा निकाह…”


यह सुनते ही सना का दिल जैसे रुक गया।


“क… क्या?”


“हमारी दुनिया के नियमों के मुताबिक… जिस इंसान को पहली बार जिन्नों का दरवाज़ा दिखाई दे जाए… उसका रिश्ता हमारी दुनिया से जुड़ जाता है…”


सना पीछे हट गई।


“नहीं! मैं कभी नहीं मानूँगी!”


ज़ायान के चेहरे पर दर्द दिखाई दिया।


“मैं भी ये नहीं चाहता था…”


सना रोने लगी।


“तो मुझे जाने दो!”


लेकिन तभी अचानक चारों तरफ बहुत डरावनी आवाजें गूंजने लगीं।


जंगल के अंधेरे में कई लाल आँखें चमकने लगीं।


सना डरकर ज़ायान के पीछे छिप गई।


ज़ायान तुरंत गुस्से में चिल्लाया—


“पीछे हट जाओ सब!”


उसकी आवाज इतनी शक्तिशाली थी कि पूरा जंगल काँप उठा।


कुछ सेकंड बाद सब शांत हो गया।


सना काँपती हुई बोली,


“ये… ये कौन थे?”


ज़ायान ने गंभीर आवाज़ में कहा,


“वो बाकी जिन्न हैं… और वो तुम्हें इंसान नहीं… शिकार समझते हैं।”


यह सुनते ही सना के पैरों तले जमीन खिसक गई।


उसे पहली बार एहसास हुआ…


कि वह सच में इंसानों की दुनिया से बहुत दूर आ चुकी है…


और उसकी जिंदगी अब एक ऐसे रहस्य में फँस चुकी थी… जहाँ से वापस लौटना शायद आसान नहीं था जिन्नों की दुनिया की वह रात इंसानी दुनिया से बिल्कुल अलग थी। वहाँ ना हवा सामान्य थी, ना आसमान, ना पेड़। सब कुछ रहस्यमयी और डरावना लग रहा था।


सना अब भी काँप रही थी।


उसके दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि उसे खुद अपनी साँसें सुनाई दे रही थीं।


वह एक बहुत बड़े काले महल के अंदर खड़ी थी।


महल की दीवारों पर नीली आग जल रही थी जो बिना किसी तेल या लकड़ी के खुद-ब-खुद जलती रहती थी। लंबे गलियारों में अजीब फुसफुसाहटें गूंज रही थीं। जमीन शीशे की तरह चमक रही थी।


और हर तरफ…


जिन्न।


कुछ इंसानों जैसे दिखते थे…


कुछ बेहद डरावने।


किसी की आँखें लाल थीं…


किसी के हाथ असामान्य रूप से लंबे…


किसी के चेहरे पर अजीब निशान बने हुए थे।


सना डर के मारे बार-बार कलमा पढ़ रही थी।


“ला इलाहा इल्लल्लाह…”


उसके पास खड़ा था — ज़ायान।


वही जिन्न जिसने उसे यहाँ लाया था।


लेकिन बाकी जिन्न उससे अलग थे।


उसकी आँखों में डर नहीं… दर्द था।


तभी अचानक पूरे महल में बहुत भारी आवाज़ गूंजने लगी।


ढम… ढम… ढम…


जैसे बहुत बड़े दरवाजे खुल रहे हों।


सभी जिन्न तुरंत झुक गए।


हवा अचानक भारी हो गई।


महल की नीली आग और तेज जलने लगी।


सना घबरा गई।


“ये… क्या हो रहा है?”


ज़ायान ने धीमी आवाज़ में कहा,


“बादशाह आ रहे हैं…”


सना का दिल जोर से धड़कने लगा।


महल की सबसे ऊँची सीढ़ियों पर धीरे-धीरे एक विशाल साया दिखाई दिया।


लंबा कद…


काले शाही कपड़े…


सिर पर बड़ा ताज…


और लाल चमकती हुई आँखें…


उसकी मौजूदगी इतनी डरावनी थी कि सना का पूरा शरीर काँप उठा।


महल के सारे जिन्न एक साथ झुक गए।


“सलाम, बादशाह-ए-जिन्नात…”


सना डरकर पीछे हट गई।


वह समझ चुकी थी कि यह कोई साधारण जिन्न नहीं था।


यह जिन्नों का राजा था।


बादशाह धीरे-धीरे सीढ़ियों से नीचे उतरने लगा।


उसके कदमों की आवाज़ पूरे महल में गूंज रही थी।


सना की साँसें तेज होती जा रही थीं।


जब बादशाह उसके सामने पहुँचा तो कुछ पल तक बस उसे घूरता रहा।


उसकी आँखें अजीब थीं…


जैसे वह इंसान के अंदर तक देख सकता हो।


फिर उसने भारी आवाज़ में पूछा—


“यही है वो इंसानी लड़की?”


ज़ायान ने सिर झुका दिया।


“जी।”


महल में खामोशी छा गई।


फिर अचानक बादशाह गुस्से में गरजा—


“तुमने हमारी दुनिया के नियम तोड़े हैं!”


उसकी आवाज इतनी भयानक थी कि महल की दीवारें काँप उठीं।


सना डरकर पीछे हट गई।


ज़ायान शांत खड़ा रहा।


“मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था।”


“इंसान को यहाँ लाना मना है!”


“अगर मैं उसे वहाँ छोड़ देता… तो अंधेरे जिन्न उसे मार देते।”


यह सुनकर महल में खुसर-पुसर होने लगी।


कुछ जिन्न गुस्से से सना को देखने लगे।


एक डरावना जिन्न आगे आया।


उसकी आँखें पूरी काली थीं।


“इंसानों पर भरोसा नहीं किया जा सकता!”


दूसरा बोला,


“इसे तुरंत वापस भेज दो!”


तीसरा हँसते हुए बोला,


“या फिर हमेशा के लिए कैद कर दो…”


सना की आँखों से आँसू निकल पड़े।


वह काँपती आवाज़ में बोली,


“मुझे मेरे घर जाना है… मेरी अम्मी अकेली हैं…”


लेकिन किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।


तभी बादशाह ने हाथ उठाया।


पूरा महल तुरंत शांत हो गया।


फिर उसने धीरे-धीरे सना की तरफ देखा।


“क्या तुम्हें पता है… तुम यहाँ क्यों लाई गई हो?”


सना ने रोते हुए सिर हिलाया।


“न… नहीं…”


बादशाह की आवाज और भारी हो गई।


“क्योंकि तुम्हारा रिश्ता अब जिन्नों की दुनिया से जुड़ चुका है।”


सना घबरा गई।


“मैं इंसान हूँ! मेरा यहाँ कोई रिश्ता नहीं!”


लेकिन तभी महल की दीवारों पर बने अजीब निशान चमकने लगे।


नीली रोशनी पूरे हॉल में फैल गई।


सभी जिन्न हैरानी से सना को देखने लगे।


अचानक सना के हाथ पर हल्का चमकता हुआ निशान उभर आया।


वह दर्द से चिल्ला उठी।


“आह्ह!”


उसने अपना हाथ देखा।


उसकी कलाई पर अजीब अरबी निशान चमक रहा था।


सना डर गई।


“ये… ये क्या है?!”


महल में खड़े कई जिन्न डर गए।


एक बूढ़ा वज़ीर घबराकर बोला,


“ये तो… निकाह का निशान है…”


सना की साँस रुक गई।


“निकाह…?”


वज़ीर काँपती आवाज़ में बोला,


“सदियों पुरानी भविष्यवाणी सच हो गई…”


पूरा महल अचानक बेचैन हो उठा।


कुछ जिन्न डरकर पीछे हटने लगे।


सना कुछ समझ नहीं पा रही थी।


वह रोते हुए चिल्लाई,


“कोई मुझे बताए आखिर हो क्या रहा है?!”


तभी बादशाह ने गंभीर आवाज़ में कहा—


“बहुत साल पहले हमारी दुनिया पर एक श्राप लगाया गया था…”


पूरा महल खामोश हो गया।


बादशाह आगे बोला,


“कहा गया था कि एक दिन इंसानों की दुनिया से एक लड़की आएगी… जिसके हाथ पर यह निशान होगा…”


सना काँपने लगी।


“न… नहीं…”


“और उसका निकाह जिन्नों के शहज़ादे से होगा…”


यह सुनते ही सना का दिल जैसे रुक गया।


उसने धीरे-धीरे ज़ायान की तरफ देखा।


ज़ायान चुप था।


उसकी आँखों में गहरा दर्द दिखाई दे रहा था।


सना की आँखों से आँसू बह निकले।


“नहीं… ये नहीं हो सकता…”


लेकिन तभी अचानक पूरे महल में बहुत तेज हवा चलने लगी।


महल की आग ऊँची उठने लगी।


दीवारों पर बने निशान चमकने लगे।


और अगले ही पल…


सना के हाथ का निशान अचानक और तेज चमकने लगा।


वह दर्द से चीख पड़ी।


ज़ायान तुरंत उसकी तरफ भागा।


“सना!”


लेकिन तभी महल के बीचोंबीच जमीन फटने लगी।


धड़ाम्म्म!!!


सभी जिन्न डरकर पीछे हट गए।


फटी हुई जमीन के अंदर से काला धुआँ निकलने लगा।


और उस धुएँ के बीच…


एक बहुत डरावनी आवाज़ गूंजी—


“आख़िरकार… इंसानी दुल्हन आ चुकी है जिन्नों की दुनिया का वह विशाल महल अचानक डर और अफरा-तफरी से भर गया था।


महल के बीचोंबीच जमीन फट चुकी थी।


काले धुएँ का विशाल गुबार ऊपर उठ रहा था। दीवारों पर जल रही नीली आग बेकाबू होकर काँपने लगी थी। हवा इतनी तेज चल रही थी कि बड़े-बड़े झूमर हिलने लगे।


सना डर के मारे काँप रही थी।


उसके हाथ पर बना चमकता हुआ निशान लगातार जल रहा था।


ऐसा लग रहा था जैसे उसकी कलाई में आग लगी हो।


“आह्ह…!”


वह दर्द से जमीन पर बैठ गई।


उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।


ज़ायान तुरंत उसके पास घुटनों के बल बैठ गया।


“सना! मेरी तरफ देखो!”


लेकिन सना दर्द से काँप रही थी।


तभी फटी हुई जमीन के अंदर से धीरे-धीरे एक विशाल काला साया बाहर आने लगा।


पूरा महल खामोश हो गया।


सभी जिन्न डरकर पीछे हट गए।


कुछ जिन्न तो काँपने लगे थे।


सना ने डरते हुए ऊपर देखा…


और उसका दिल दहल गया।


वह कोई साधारण जिन्न नहीं था।


उसका शरीर काले धुएँ से बना हुआ था। आँखें आग की तरह लाल थीं। उसके लंबे नुकीले हाथ जमीन तक पहुँच रहे थे। उसके चारों तरफ अंधेरा घूम रहा था।


जैसे रोशनी भी उससे डर रही हो।


महल में खड़े कई जिन्न सिर झुकाकर पीछे हट गए।


एक बूढ़ा वज़ीर काँपती आवाज़ में बोला—


“अंधेरे जिन्नों का सरदार… ‘शहज़ार’…”


यह नाम सुनते ही पूरे महल का माहौल और भारी हो गया।


सना कुछ समझ नहीं पा रही थी।


लेकिन इतना जरूर समझ गई थी कि यह बहुत खतरनाक था।


शहज़ार धीरे-धीरे हँसने लगा।


उसकी हँसी इंसानों जैसी नहीं थी।


ऐसा लग रहा था जैसे कई आवाजें एक साथ हँस रही हों।


“हा… हा… हा…”


महल की दीवारें काँपने लगीं।


फिर उसकी लाल आँखें सीधे सना पर टिक गईं।


“तो यही है वो इंसानी लड़की…”


सना डरकर ज़ायान के पीछे छिप गई।


उसका पूरा शरीर काँप रहा था।


ज़ायान तुरंत उसके सामने खड़ा हो गया।


उसकी आवाज पहली बार बेहद सख्त हो गई।


“सना से दूर रहो।”


शहज़ार जोर से हँसा।


“तुम अब भी इसे बचाना चाहते हो?”


ज़ायान की आँखों में गुस्सा दिखाई देने लगा।


“जब तक मैं जिंदा हूँ… इसे कोई हाथ नहीं लगाएगा।”


यह सुनकर महल में खड़े जिन्न एक-दूसरे को देखने लगे।


सना हैरान रह गई।


उसे समझ नहीं आ रहा था कि ज़ायान उसके लिए इतना क्यों लड़ रहा है।


तभी जिन्नों के बादशाह आगे बढ़े।


उनकी भारी आवाज पूरे हॉल में गूंजी—


“शहज़ार! यह महल तुम्हारी अंधेरी दुनिया नहीं है। यहाँ तुम्हारा कोई हक नहीं।”


शहज़ार की लाल आँखें चमक उठीं।


“गलती मत करो बादशाह…”


उसने धीरे-धीरे सना की तरफ इशारा किया।


“यह लड़की अब सिर्फ इंसानों की नहीं रही…”


सना की साँसें रुकने लगीं।


“न… नहीं…”


लेकिन शहज़ार आगे बोला—


“इसके हाथ पर जो निशान है… वही हमारी दुनिया का दरवाज़ा खोलेगा।”


महल में खड़े कई जिन्न घबरा गए।


एक वज़ीर डरते हुए बोला,


“अगर भविष्यवाणी सच हो गई… तो दोनों दुनियाओं का संतुलन टूट जाएगा…”


सना रोते हुए बोली,


“मुझे कुछ नहीं चाहिए! मुझे बस मेरे घर जाना है!”


लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुन रहा था।


तभी अचानक शहज़ार ने अपना लंबा हाथ हवा में उठाया।


और अगले ही पल…


महल की सारी नीली आग बुझ गई।


पूरा हॉल अंधेरे में डूब गया।


सना चीख पड़ी।


चारों तरफ डरावनी फुसफुसाहटें गूंजने लगीं।


ऐसा लग रहा था जैसे हजारों जिन्न अंधेरे में घूम रहे हों।


सना डर के मारे ज़ायान का हाथ पकड़कर खड़ी हो गई।


उसका हाथ अब भी बर्फ जैसा ठंडा था।


लेकिन उस वक्त वही उसका सहारा था।


अचानक अंधेरे में लाल आँखें चमकीं।


शहज़ार की आवाज़ गूंजी—


“अगर इंसानी लड़की मेरी नहीं हुई… तो कोई भी इसे नहीं पाएगा…”


और अगले ही पल…


उसने सना की तरफ हमला कर दिया।


तेज काला धुआँ बिजली की तरह उसकी तरफ बढ़ा।


सना चीख उठी।


लेकिन तभी ज़ायान उसके सामने आ गया।


धड़ाम्म्म!!!


पूरा महल जोर से काँप उठा।


ज़ायान और शहज़ार की शक्तियाँ आपस में टकराईं।


नीली और काली रोशनी पूरे हॉल में फैल गई।


कई जिन्न दूर जाकर गिर पड़े।


सना जमीन पर गिर गई।


उसने डरते हुए ऊपर देखा।


ज़ायान अब पहले जैसे नहीं लग रहे थे।


उनकी आँखें चमक रही थीं।


उनके चारों तरफ नीली आग घूम रही थी।


महल के सारे जिन्न डरकर उन्हें देखने लगे।


वज़ीर हैरानी से बोला—


“शहज़ादे की असली ताकत जाग गई…”


ज़ायान गुस्से में शहज़ार को देख रहे थे।


“मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी…”


शहज़ार हँसा।


“तुम्हारी ताकत भी अब इसे नहीं बचा सकती।”


और फिर दोनों के बीच भयानक लड़ाई शुरू हो गई।


पूरा महल काँप रहा था।


दीवारों में दरारें पड़ने लगीं।


आसमान में बिजली चमक रही थी।


सना रोते हुए एक कोने में बैठी थी।


उसे लग रहा था जैसे वह किसी डरावने सपने में फँस गई हो।


तभी अचानक उसके हाथ का निशान फिर चमकने लगा।


पहले हल्का…


फिर बहुत तेज…


“आह्ह्ह!”


सना दर्द से चीख पड़ी।


उसकी चीख सुनकर दोनों जिन्न रुक गए।


और अगले ही पल…


सना के शरीर के चारों तरफ सुनहरी रोशनी फैलने लगी।


पूरा महल हैरानी से उसे देखने लगा।


यह रोशनी बाकी जिन्नों की शक्तियों से बिल्कुल अलग थी।


बहुत पवित्र…


बहुत शक्तिशाली…


शहज़ार पहली बार डर गया।


उसकी लाल आँखें फैल गईं।


“न… ये कैसे हो सकता है…”


वहीं जिन्नों के बादशाह धीरे-धीरे बोले—


“भविष्यवाणी का दूसरा हिस्सा भी सच हो चुका है…”


सना काँपती आवाज़ में बोली,


“क… कौन सी भविष्यवाणी…?”


लेकिन जवाब देने से पहले ही…


महल के बाहर अचानक हजारों जिन्नों की डरावनी चीखें गूंजने लगीं…


और पूरा आसमान खून की तरह लाल हो गया जिन्नों की दुनिया का आसमान पूरी तरह लाल हो चुका था।


ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया आग में जल रही हो।


महल के बाहर हजारों डरावनी चीखें गूंज रही थीं। हवा इतनी तेज चल रही थी कि विशाल पेड़ जड़ों समेत हिलने लगे थे। आसमान में काली बिजली चमक रही थी।


महल के अंदर हर जिन्न डरा हुआ था।


सना अभी भी जमीन पर बैठी काँप रही थी।


उसके चारों तरफ फैली सुनहरी रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थी।


लेकिन उसके हाथ पर बना वह अजीब निशान अब पहले से ज्यादा चमक रहा था।


ज़ायान कुछ दूरी पर खड़े उसे देख रहे थे।


उनकी आँखों में डर भी था… और दर्द भी।


दूसरी तरफ शहज़ार गुस्से से जल रहा था।


उसकी लाल आँखें आग की तरह चमक रही थीं।


वह जोर से गरजा—


“ये नामुमकिन है!”


महल की दीवारें काँप उठीं।


जिन्नों के बादशाह धीरे-धीरे आगे बढ़े।


उनकी भारी आवाज पूरे हॉल में गूंजी—


“भविष्यवाणी पूरी हो रही है…”


सना काँपती आवाज़ में बोली,


“को… कौन सी भविष्यवाणी…? आखिर मुझसे क्या चाहते हो तुम लोग?!”


महल में कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।


फिर बूढ़ा वज़ीर आगे आया।


उसकी सफेद आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था।


वह धीमी आवाज़ में बोला—


“सदियों पहले… जिन्नों और इंसानों की दुनिया के बीच एक भयानक युद्ध हुआ था…”


पूरा महल शांत हो गया।


सना डरी हुई उसकी बातें सुन रही थी।


वज़ीर आगे बोला—


“उस युद्ध में अंधेरे जिन्नों ने दोनों दुनियाओं को खत्म करने की कोशिश की थी…”


शहज़ार गुस्से से हँस पड़ा।


“क्योंकि इंसान कमजोर हैं!”


लेकिन बादशाह की लाल आँखें चमक उठीं।


“खामोश!”


उनकी आवाज इतनी भारी थी कि पूरा महल काँप गया।


फिर उन्होंने सना की तरफ देखा।


“उस युद्ध को रोकने के लिए एक बहुत बड़े आलिम ने श्राप दिया था…”


सना की साँसें रुकने लगीं।


“कैसा श्राप…?”


बादशाह धीरे-धीरे बोले—


“जब तक इंसानों की दुनिया से एक पाक दिल लड़की आकर जिन्नों के शहज़ादे से निकाह नहीं करेगी… तब तक दोनों दुनियाओं पर खतरा बना रहेगा…”


सना के चेहरे का रंग उड़ गया।


“न… नहीं…”


उसकी आँखों से आँसू निकल पड़े।


“मैं इंसान हूँ… मैं किसी जिन्न से निकाह नहीं कर सकती…”


लेकिन तभी उसके हाथ का निशान फिर चमकने लगा।


सना दर्द से कराह उठी।


ज़ायान तुरंत उसकी तरफ बढ़े।


“सना!”


उन्होंने उसका हाथ पकड़ा।


और जैसे ही ज़ायान ने उसका हाथ छुआ…


निशान अचानक शांत हो गया।


पूरा महल हैरानी से भर गया।


वज़ीर काँपती आवाज़ में बोला—


“सिर्फ शहज़ादे का स्पर्श ही इस निशान को शांत कर सकता है…”


सना डरकर तुरंत पीछे हट गई।


उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे।


“नहीं… ये सब गलत है…”


ज़ायान चुप थे।


उनकी आँखों में गहरा दर्द दिखाई दे रहा था।


तभी अचानक महल के बाहर जोरदार धमाका हुआ।


धड़ाम्म्म!!!


पूरा महल हिल गया।


एक जिन्न सैनिक भागता हुआ अंदर आया।


“बादशाह! अंधेरे जिन्नों ने हमला कर दिया!”


महल में अफरा-तफरी मच गई।


बाहर से चीखों की आवाजें आने लगीं।


शहज़ार जोर से हँस पड़ा।


“मैंने कहा था ना… अगर लड़की मेरी नहीं हुई… तो कोई इसे नहीं पाएगा!”


और अगले ही पल…


उसका शरीर काले धुएँ में बदल गया।


वह गायब हो गया।


बादशाह तुरंत गरजे—


“महल के दरवाजे बंद कर दो!”


लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।


महल के बाहर हजारों अंधेरे जिन्न जमा हो चुके थे।


उनकी लाल आँखें अंधेरे में चमक रही थीं।


आसमान पूरी तरह काला हो चुका था।


सना डर के मारे काँप रही थी।


उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।


वह रोते हुए बोली,


“मुझे मेरे घर जाना है… मेरी अम्मी…”


लेकिन ज़ायान धीरे से बोले—


“अब बहुत देर हो चुकी है…”


सना ने गुस्से से उनकी तरफ देखा।


“ये सब तुम्हारी वजह से हुआ!”


ज़ायान चुप रहे।


कुछ पल बाद उन्होंने धीरे से कहा—


“अगर उस रात मैं तुम्हें कुएँ के पास छोड़ देता… तो अंधेरे जिन्न तुम्हारी रूह ले जाते…”


सना खामोश हो गई।


उसे पहली बार एहसास हुआ…


कि शायद ज़ायान सच में उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे।


तभी अचानक महल के बड़े दरवाजे टूट गए।


धड़ाम्म्म!!!


काला धुआँ पूरे हॉल में फैल गया।


अंधेरे जिन्न अंदर घुस आए।


महल में लड़ाई शुरू हो गई।


नीली और काली शक्तियाँ आपस में टकराने लगीं।


चीखें…


धमाके…


आग…


पूरा महल युद्ध का मैदान बन चुका था।


सना डर के मारे रो रही थी।


तभी एक अंधेरा जिन्न उसकी तरफ झपटा।


उसकी लाल आँखें खून जैसी चमक रही थीं।


सना चीख पड़ी।


लेकिन तभी ज़ायान बिजली की तरह उसके सामने आ गए।


उन्होंने अपने हाथ से नीली आग निकाली।


धड़ाम्म!!!


वह अंधेरा जिन्न दूर जाकर दीवार से टकराया।


ज़ायान जोर से बोले—


“सना! मेरे पीछे रहो!”


उनकी आवाज में पहली बार डर था।


जैसे उन्हें सना को खोने का डर हो।


युद्ध और भयानक होता जा रहा था।


महल टूटने लगा था।


वज़ीर भागते हुए बादशाह के पास आए।


“अगर अभी निकाह नहीं हुआ… तो भविष्यवाणी अधूरी रह जाएगी!”


सना का दिल बैठ गया।


“नहीं…”


लेकिन बादशाह गंभीर आवाज़ में बोले—


“अब सिर्फ यही रास्ता बचा है…”


सना रोने लगी।


“मैं नहीं कर सकती…”


तभी अचानक पूरा महल जोर से काँपा।


छत का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा।


अंधेरे जिन्न तेजी से अंदर आ रहे थे।


ज़ायान घायल हो चुके थे।


उनके हाथ से नीली रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही थी।


लेकिन फिर भी वह सना के सामने ढाल बनकर खड़े थे।


उन्होंने दर्द भरी आवाज़ में कहा—


“अगर निकाह नहीं हुआ… तो दोनों दुनियाएँ खत्म हो जाएँगी…”


सना की आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे।


उसने पहली बार ज़ायान की आँखों में देखा।


वहाँ डर नहीं था…


सिर्फ सच्चाई थी।


और शायद…


मोहब्बत भी।


तभी अचानक शहज़ार फिर प्रकट हुआ।


उसकी आवाज पूरे महल में गूंजी—


“अब फैसला करो… इंसानी लड़की…”


पूरा महल खामोश हो गया।


सभी की नजरें सना पर टिक गईं।


उसकी साँसें तेज हो रही थीं।


दिल काँप रहा था।


और फिर…


आँखों में आँसू लिए…


सना ने धीरे-धीरे ज़ायान की तरफ देखा 

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